
employment office
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
25 से 30 साल पहले तक रोजगार कार्यालय (employment excahnge) में बगैर पंजीयन नौकरियां नहीं मिलती थी। यह दफ्तर सरकारी नौकरियों का ‘गेटवे ’ (प्रवेश द्वार) माना जाता थे। वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के दौर में यह बातें बीते जमाने जैसी हैं। इन दफ्तरों का कार्य अब मार्गदर्शन-पंजीयन (registration) सहित किसी संस्था के साथ कैंपस प्लेसमेंट (campus placement), जॉब फेयर (job fair) आयोजन तक सिमट गया है।
युवाओं को नौकारियां (youth) मुहैया कराने के लिए प्रदेश में 70 साल पहले रोजगार कार्यालय खोले गए थे। सरकारी (govt jobs) अथवा निजी नौकरियों (private jobs) के लिए बेरोजगारों का पंजीयन कराना अनिवार्य था। कनिष्ठ/वरिष्ठ लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी औय अन्य पदों के लिए पंजीकृत युवाओं को यह कार्यालय नियोक्ता की सूचना और उनकी योग्यतानुसार (qualification) नौकरियों की सूचना देता था। यह स्थिति 1990 तक यथावत चली।
निजीकरण-आईटी से बदला ट्रेंड
1992 के बाद देश में निजीकरण (privatization)और आईटी का दौर शुरू हुआ। इस बदलाव (trend change) ने रोजगार कार्यालयों को जल्द पीछे धकेल दिया। सरकारी शैक्षिक संस्थानों-निजी कम्पनियों के बीच एमओयू (MOU) का दौर चला। मल्टीनेशनल और राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय कम्पनियों (companies) ने खुद के कैंपस प्लेसमेंट शुरू कर दिए। आरपीएससी (rpsc ajmer) और राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड जैसी संस्थाओं की भर्ती परीक्षाओं (recruitment exams) के चलते रोजगार कार्यालयों का काम सिमटता चला गया।
दफ्तर अपडेट, काम मार्गदर्शन
रोजगार कार्यालयों को अब व्यावसायिक मार्गदर्शन (business councelling) और परामर्श केंद्र नाम से दिया गया है। वक्त के साथ इन दफ्तरों ने आईटी को अपनाया। युवाओं के लिए ऑनलाइन पंजीयन (online registration) शुरू हुए। सूचनाएं देने के लिए फेसबुक पेज (facebook page) बनाया। ई-मित्र, राजस्थान संपर्क पोर्टल, ई-प्रोक्योरमेंट, नेशनल कॅरियर सर्विस जैसे पोर्टल से जोड़ा। लेकिन इन कार्य मार्गदर्शन, परामर्श और सरकारी-निजी कंपनियों के जॉब फेयर (job fair) आयोजन तक सिमट गया है। कुछ हद तक भत्ते के लिए युवाओं पंजीयन करा रहे हैं।
फैक्ट फाइल...
33 जिलों में हैं क्षेत्रीय-उप क्षेत्रीय रोजगार कार्यालय
50 से 70 हजार पंजीयन अजमेर जिले में प्रतिवर्ष
7 लाख बेरोजगार प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं देश में
3500 रुपए भत्ता देने की है सरकार ने घोषणा
यूं बढ़ सकता है इन दफ्तरों का काम...
-प्रत्येक सरकारी और निजी भर्तियों के लिए पंजीयन नंबर की अनिवार्यता
-नौकरियों से पहले रोजगार कार्यालय में कौशल प्रशिक्षण
-वैश्विक रोजगार संस्थानों-कार्यालयों से एमओयू-रोजगार कार्यालयों से सरकारी
-निजी नौकरियों की ऑनलाइन परीक्षा-परिणाम
-अन्य प्रदेशों के रोजगार कार्यालयों से ऑनलाइन लिंक और पंजीयन सुविधाएं
रोजगार कार्यालयों की बेरोजगारों के बहुत अहमियत रही है। आईटी और निजीकरण से यह अनुपयोगी से हो गए हैं। इन्हें फिर से संजीवनी की जरूरत है। निजी संस्थाओं में संचालित कौशल विकास, आरएससीआईटी जैसे संस्थानों के कोर्स का पंजीयन यहां होना चाहिए। युवाओं का कॉलेज-विश्वविद्यालयों में प्रवेश के साथ इन कार्यालयों में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना चाहिए। इससे कार्यालयों की उपयोगिता बनी रहेगी।
डॉ. आलोक चतुर्वेदी, रीडर केमिस्ट्री एसपीसी-जीसीए
Published on:
10 Oct 2019 07:15 am
