
अलीगढ़ सिविल लाइन कोतवाली पुलिस ने आजमगढ़ निवासी सैफ आलम की जगह 6 साल पहले हमदर्द नगर बी निवासी एक निर्दोष युवक सैफ आलम को हत्या के आरोप में आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया था। 6 साल बाद जेल भेजे गए युवक को अपराध अनुसंधान विभाग की आगरा शाखा की जांच टीम ने निर्दोष करार दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना सिविल लाइन कोतवाली के तत्कालीन विवेचक व इंस्पेक्टर रहे सूर्यकांत द्विवेदी पर मुकदमा दर्ज किया है।
दरअसल, यह घटना सितंबर 2015 की है। जब कोतवाली सिविल लाइंस क्षेत्र के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाके में एक छात्र को गोली मार दी गई थी और इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई थी। छात्र की मौत के मामले में कोतवाली सिविल लाइन में अजीम, हस्सान, आमिर, ओसामा, अजीम, सैफ आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस केस की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी ने की थी। उन्होंने विवेचना में ओसामा, जुनैद, माज व आमिर की नामजदगी गलत बताते हुए 29 फरवरी 2016 को अजीम, मामून व सैफ आलम के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
पीड़ित पिता की शिकायत पर दिए थे जांच के आदेश
इंस्पेक्टर सूर्यकांत ने विवेचना में यूपी के आजमगढ़ निवासी सैफ आलम की जगह सिविल लाइन क्षेत्र के हमदर्द नगर बी जमालपुर निवासी सैफ आलम को अपराधी घोषित कर दिया। अपराधी घोषित किए जाने के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर ने सैफ आलम के पिता को फोन किया और बेटे को थाने बुलाया गया। पिता के साथ थाने पहुंचे सैफ आलम को पुलिस ने गिरफ्त में लेते हुए चालान कर जेल भेज दिया था। इसके बाद पिता ने बेटे को निर्दोष बताते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
सिविल लाइन कोतवाली में दर्ज हुआ केस
पीड़ित पिता की शिकायत पर उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन, अपराध अनुसंधान विभाग की आगरा शाखा को सौंपी थी। जांच के बाद अब सैफ आलम को निर्दोष बताया गया है। सिविल लाइन कोतवाली इंस्पेक्टर प्रवेश राणा ने बताया कि अपराध अनुसंधान विभाग की आगरा शाखा की तरफ से तत्कालीन इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
Published on:
28 Oct 2022 11:00 am
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