
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग पीड़िता को मां की अभिरक्षा में सौंपने का दिया निर्देश
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित नाबालिग लड़की को जिला बाल कल्याण समिति द्वारा राजकीय बाल गृह में रखने के आदेश को कानून की मंशा के खिलाफ करार देते हुए रद्द कर दिया है और 15 साल की लड़की को उसकी मां की अभिरक्षा में सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जुवनाइल जस्टिस कानून बच्चे के हित में कमेटी को अधिकार देता है और उसकी इच्छा भी देखनी चाहिए। बेहतर हित को देखते हुए आदेश दिया जाना चाहिए। लड़की ने मां के साथ जाने की इच्छा जताई फिर भी कमेटी ने उसकी इच्छा के विपरीत राजकीय बाल गृह में भेज दिया। कोर्ट ने पीड़िता को मां को सुपुर्द करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने नाबालिग लड़की की तरफ से मां की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
यह घटना कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र की है। याचिका में बाल कल्याण समिति कासगंज के पीड़िता को मां की अभिरक्षा में न देकर राजकीय बाल गृह में रखने की वैधता को चुनौती दी गई थी। मां ने बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने उसे 16 जनवरी 22 को रेलवे पटियाली स्टेशन से बरामद किया और 24 जनवरी 22 को लड़की का बयान लिया गया। जिसमें उसने मां के साथ जाने की इच्छा जताई। दिल्ली में रह रही मां द्वारा अभिरक्षा मांगने की अर्जी भी दी गई। इसके बावजूद बाल गृह में भेज दिया। पीड़िता अपने मामा के घर में रह रही थी।
Published on:
28 Jul 2022 09:42 pm
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