
अलवर का दर्द : कब दूर होगा यह दर्द? इन कॉलोनियों का कौन हमदर्द?
राजस्थान का सिंहद्वार है अलवर। आज इस खूबसूरत शहर की हालत खस्ता हो रही है। शहर की अधिकांश कॉलोनियों के बाशिंदे परेशान हैं। पत्रिका टीम ने शहर के चार अलग-अलग प्रमुख क्षेत्र में जाकर हालात का जायजा लिया। तस्वीर आपके सामने है। जिम्मेदारों के लिए यह आइना है। जल्द ही शेष क्षेत्रों पर अभियान की रिपोर्ट आएंगी।
जानिए यहां के हालात
पत्रिका टीम ने बुधवार को स्कीम दो, स्कीम तीन, शिवाजी पार्क बड़ी कॉलोनियों का मौका देखा तो पाषाण युग से भी बुरे हाल दिखे। शहर जैसा कुछ लगा नहीं।
अलवर. शहर की एक चौथाई आबादी के बाद पहुंचे तो हर जगह सड़क पर रोड़े, सीवर का पानी, गंदगी से भरे नाले और प्यासे चेहरे सामने आए। इन दिनों हालात वाकई ज्यादा विकट हैं। जनता को गंदे नाले में कुलबिलाते कीड़े, मल और मलबे के बीच जीना पड़ रहा है। हवा में इतनी बदबू हो गई कि अच्छी खासी जगह का व्यक्ति एक मिनट नहीं रुक सकता। सहूलियत की छोड़ो। अधिकतर सड़कें मलबे में बदल गई हैं। घरों के आगे रोड़े पड़े हैं। बेतरतीब खुदाई जारी है। सड़क बनाने के बाद सीवर व पानी की लाइन डाल रहे हैं। फिर सड़क बनने के बाद सड़क तोड़कर कनेक्शन दे रहे हैं। कोई मॉनिटरिंग व आपसी सामंजस्य नहीं है। जगह-जगह सड़क, पानी, सीवर के नाम की उद्घाटन पट्टिकाएं जरूर दिख जाएंगी, लेकिन उनके आसपास की हालात देखी नहीं जाती। रोडलाइट तो बहुत आगे की समस्या है। उससे पहले तो पीने व नहाने का पानी नहीं मिल रहा। घर के आगे कचरा व कीचड़ सड़ रहा है। पानी निकासी होती ही नहीं है। अब तो आगामी विधानसभा चुनाव भी नजदीक आ गए। तब भी सरकार नहीं चेत रही। जनप्रतिनिधियों को परवाह होती तो यह हालात होते ही नहीं।
बुधवार को 4.5 लाख की आबादी में से करीब 1.25 लाख की आबादी का मौका देखा तो हालात रूह कंपाने वाले मिले। चाहे कृषि कॉलोनी हो या यूआईटी की। सब जगह सड़कें उधड़ी पड़ी हैं। जंगली पौधे खड़े हैं। अवैध नल कनेक्शन ने वैध लोगों के हलक सुखा दिए हैं। शिकायत के बावजूद कोई सुन नहीं रहा।
शिवाजी पार्क में घरों में गंदा पानी
यूआईटी की सबसे पुरानी कॉलोनी शिवाजी पार्क में सफाई व ड्रेनेज व्यवस्था का हाल-बेहाल था। यहां नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा था। शिवाजी पार्क 3,4,5,6 क के हालात बेहद खराब थे। नालियों के पानी को घर में घुसने से रोकने के लिए लोगों ने अपने घरों के फर्श ऊंचे करा रखे थे। सीवरेज भी ओवरफ्लो थी।
शहर में सफाई व्यवस्था का हाल-बेहाल है। नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं। सीवरेज का पानी सड़कों पर बहता है। नलों में पानी के साथ कब सीवरेज का पानी मिलकर आ जाए, पता नहीं। यह स्थिति अकेले स्कीम दो की नहीं बल्कि पूरे शहर की है।
श्रवण सिंघल, निवासी स्कीम-2
Updated on:
05 Jul 2018 11:20 am
Published on:
05 Jul 2018 10:17 am
