
representative picture (AI)
खैरथल-तिजारा जिले के गठन के बाद अलवर तहसील से जुड़े कई गांवों के सामने प्रशासनिक सीमाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्थिति यह है कि एक ही गांव का राजस्व रिकॉर्ड अलवर जिले में है, जबकि शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य समेत कुछ विभागों का कामकाज खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास ब्लॉक से संचालित हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने सवाल है कि किस काम के लिए उन्हें अलवर जाना है और किस काम के लिए किशनगढ़ बास।
किथुर, बहादुरपुर नगरपालिका क्षेत्र से जुड़े गांव, जोड़ियां पट्टी, चिकानी, भजेड़ा, कारौली सहित कई गांव राजस्व रिकॉर्ड में अलवर तहसील और जिला अलवर के अधीन हैं। दूसरी ओर इन क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था, आंगनबाड़ी और कुछ अन्य विभागीय गतिविधियां किशनगढ़ बास ब्लॉक से संचालित की जा रही हैं। अलग-अलग विभागों की अलग प्रशासनिक सीमाओं के कारण लोगों को सरकारी काम के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस प्रशासनिक स्थिति का असर विद्यार्थियों और आमजन के दस्तावेजों पर भी दिखाई दे रहा है। मूल निवास प्रमाण-पत्र अलवर जिले से जारी हो रहा है, जबकि शैक्षिक रिकॉर्ड या अध्ययन प्रमाण-पत्र में जिला खैरथल-तिजारा और ब्लॉक किशनगढ़ बास दर्ज हो रहा है। जन्म प्रमाण-पत्र समेत अन्य दस्तावेजों को लेकर भी ग्रामीणों में असमंजस है। लोगों को चिंता है कि भविष्य में नौकरी, उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति या सरकारी योजनाओं में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान अलग-अलग जिलों का उल्लेख परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर विद्यार्थियों और नौकरी के लिए आवेदन करने वाले युवाओं के सामने यह स्थिति सवाल खड़े कर रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती में भी प्रशासनिक सीमाओं का यह अंतर परेशानी पैदा कर सकता है। स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया में राजस्व क्षेत्र और विभागीय ब्लॉक की सीमाएं अलग होने से पात्रता, आवेदन और दस्तावेज सत्यापन को लेकर अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इन गांवों की राजनीतिक और विभागीय पहचान भी अलग-अलग है। गांव अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, लेकिन कुछ विभागीय योजनाएं और गतिविधियां किशनगढ़ बास ब्लॉक के माध्यम से संचालित हो रही हैं। इससे ग्रामीणों को अलग-अलग सरकारी कामों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नए जिलों के गठन का उद्देश्य प्रशासन को लोगों के करीब लाना और सरकारी सेवाओं को आसान बनाना था। लेकिन एक ही गांव के अलग-अलग विभाग अलग जिलों से संचालित होने से समस्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस स्थिति को स्पष्ट करे और राजस्व, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित प्रमुख विभागों की सीमाओं में एकरूपता लाई जाए।
Updated on:
17 Sept 2026 12:02 pm
Published on:
17 Sept 2026 12:02 pm
