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सीईसी दल ने किया खनन क्षेत्रों का दौरा, नहीं सुनी ग्रामीणों की, जबकि इन हालातों में जी रहे है लोग

स्थानीय प्रशासन ने पीडि़त ग्रामीणों को सीईसी दल से मिलने से रोका
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अलवर

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Prem Pathak

Jul 07, 2018

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सीईसी दल ने किया खनन क्षेत्रों का दौरा, नहीं सुनी ग्रामीणों की, जबकि इन हालातों में जी रहे है लोग

भिवाड़ी. शुक्रवार को हसनपुर माफी ग्राम में सीईसी की टीम से मिलकर उन्हें वहां होने वाले अवैध खनन से हो रही परेशानी से अवगत कराना चाहा तो उन्हें मौके पर मौजूद प्रशासन के निर्देश पर पुलिस जाब्ते ने खदेड़ दिया। ग्रामीण उन्हें बताना चाहते थे कि गुरुवार तक वहां अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह से बंद था। इससे प्रतीत होता है कि सीईसी टीम के आने की खनन माफिया को पूर्व सूचना थी।
जिससे उन्होंने मौके से खनन में प्रयुक्त होने वाले सारे उपकरण वहां से हटा लिए।

ब्लास्टिंग से थर्राई दीवारों में पड़ी दरारें

ग्रामीणों ने पत्रिका कार्यालय आकर बताया कि खनन के दौरान गांव में दिन-रात ब्लास्टिंग होती है। ब्लास्टिंग के धमाकों से न सिर्फ सरकारी स्कूल भवन बल्कि गांव के अमूमन घरों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। गांव की तिजारा से फिरोजपुर झिरका जाने वाली मुख्य सड़क पर दौडऩे वाले 40 टन पत्थरों के डंपरों से 2-2 फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। जिनमें इस दौरान वर्षा का पानी भरा है और आवागमन करने वाले दुपहिया एवं छोटे यात्री वाहन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

क्रशर की डस्ट से बीमारी

वर्षा काल नहीं होने पर यहां इतनी रेत उड़ती है कि गांव के वृक्षों के पत्तों का हरा रंग तक दिखाई नहीं देता, वहीं गांव के घरों और वाशिंदों की हालत तो और भी बदतर हो जाती है। दरअसल यहां चलने वाले क्रशर्स से रोड़ी बनते हुए पत्थरों की डस्ट उड़ती है, जो दूर-दूर तक जाकर वनस्पति और भवनों में जम जाती है। इसके अलावा वाशिंदों के सांस लेते समय उनके शरीर में प्रवेश कर जाती है। जिससे क्रशर्स पर काम करने वाले श्रमिक और गांव के वाशिदों को दमा, टीबी व एलर्जी सहित सांस संबंधी कई जानलेवा बीमारियां हो चुकी हैं।

प्रशासन नहीं करता सुनवाई

ग्रामीण अवैध खनन से तंग होकर अनेक बार तिजारा एसडीएम, खनिज अभियंता, वन प्रशासन एवं पुलिस विभाग को ज्ञापन देकर अपनी पीड़ा जता चुके, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। उन्हें हर बार किसी न किसी बहाने से टाल दिया जाता है। ग्रामीण इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक से कर चुके। इस सबसे स्थानीय प्रशासन एवं खनन माफिया का नापाक गठबंधन स्पष्ट प्रतीत हो जाता है। ग्रामीणों के ज्यादा विरोध करने पर खनन माफिया के बाउंसर्स से उन्हें धमकियां देकर शांत कर किया जाता है। वहीं प्रशासन इसकी शिकायत करने पर आंखों पर पट्टी बांध लेता है।

पहाड़ी के आसपास सैकड़ों बीघा भूमि हुई बंजर

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अधिकांश लोगों का मुख्य काम खेती और पशुपालन है, लेकिन अवैध खनन के चलते पहाड़ी के आसपास की सैकड़ों बीघा भूमि बंजर हो गई है। उन्होंने कहा कि जब ब्लास्टिंग होती है तो पहाड़ी के आसपास की भूमि में भारी भरकम पत्थर आकर गिरते हैं, जिससे फसल तो खराब होती ही है, खेत में काम करने वाला किसान भी पत्थरों से चोटिल हो जाता है। इसलिए पहड़ी के आसपास खेती करना छोड़ दिया है ।