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Alwar: माउंट एल्ब्रुस फतह कर डॉ. आशा ने रचा इतिहास, शिखर पर लहराया तिरंगा

राजस्थान की डॉ. आशा ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस फतह कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। 21 अगस्त को 5,642 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचकर उन्होंने तिरंगा लहराया और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के साथ महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया है।
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dr asha

डॉ. आशा

जिस हाथ में वर्षों से मरीजों की सेवा की जिम्मेदारी रही, उसी हाथ ने अब दुनिया की ऊंची चोटियों पर तिरंगा थाम लिया है। राजस्थान की डॉ. आशा ने 21 अगस्त 2026 को 5,642 मीटर ऊंची माउंट एल्ब्रुस को फतह कर एक बार फिर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। शिखर पर पहुंचकर उन्होंने तिरंगा फहराने के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दुनिया तक पहुंचाया।

डॉ. आशा वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाटूवास, कोटकासिम, खैरथल-तिजारा में नर्सिंग अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। मूल रूप से झुंझुनूं की रहने वाली डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रही हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ पर्वतारोहण के अपने जुनून को जिंदा रखना और लगातार नई ऊंचाइयां छूना उनकी कहानी को खास बनाता है।

एवरेस्ट पहले ही कर चुकीं फतह

डॉ. आशा के लिए एल्ब्रुस कोई पहला बड़ा पर्वत नहीं है। वर्ष 2017 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में चीन की ओर से माउंट एवरेस्ट फतह किया था। उनका कहना है कि उन्होंने विश्व और भारत में एवरेस्ट फतह करने वाली पहली नर्सिंग अधिकारी बनने का रिकॉर्ड बनाया। उनका अगला लक्ष्य अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो चोटी है। वह फिलहाल अफ्रीका में हैं और अपने अगले अभियान की तैयारी कर रही हैं।

उनका सपना वर्ष 2026-27 में सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह कर ‘सेवन समिट्स’ अभियान पूरा करना है। एल्ब्रुस इस बड़े लक्ष्य की दिशा में उनकी एक और महत्वपूर्ण कामयाबी है।

पर्वतारोहण के साथ निशानेबाजी में भी पहचान

डॉ. आशा सिर्फ पर्वतारोहण में ही सक्रिय नहीं हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने चार स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीते।

बेटियों के नाम संदेश

एल्ब्रुस पर्वत की चोटी पर तिरंगे के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश पहुंचाकर डॉ. आशा ने बेटियों के लिए प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।

डॉ. आशा का कहना है कि बेटियों को परिस्थितियों और सीमाओं के कारण अपने सपनों को छोटा नहीं करना चाहिए। मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के साथ हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बेटियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करने का संदेश दिया।

‘चिकित्सा विभाग को गर्व’
कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने डॉ. आशा की उपलब्धि पर कहा कि उनकी सफलता पर चिकित्सा विभाग को गर्व है।