
मत्स्य उत्सव का आगाज (फोटो- पत्रिका)
Alwar Matsya Festival: अलवर: पूर्व में यह आयोजन अलवर उत्सव के नाम से होता था। बाद में इसका नाम बदलकर मत्स्य उत्सव कर दिया गया। क्योंकि अलवर को प्राचीन काल से ही मत्स्य प्रदेश के रूप में जाना जाता है। इसकी तारीखें भी बार-बार बदलती रहीं।
पिछले एक दशक से यह आयोजन अलवर के स्थापना दिवस के दिन आयोजित किया जा रहा है। साल 1994 में पहली बार अलवर उत्सव की शुरुआत हुई। तब तीन दिवसीय अलवर उत्सव का आयोजन रमेश अग्रवाल और कवि बलवीर सिंह करुण, करूण, अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से किया गया। विश्व प्रसिद्ध सितार वादक विश्व मोहन भट्ट का कार्यक्रम 1995 में हुआ।
तत्कालीन जिला कलक्टर मनोहर कांत के प्रयासों से जिला प्रशासन तथा मत्स्य संस्कृति एवं पर्यावरण ट्रस्ट की ओर से 21 नवंबर से 24 नवंबर 1995 तक अलवर महोत्सव आयोजित किया गया। इसके बाद 2001 तक अलवर महोत्सव आयोजित नहीं हो पाया। इसके बाद तत्कालीन कलक्टर तन्मय कुमार ने पुन: अलवर उत्सव को सरकारी स्तर पर मनाने की पहल की। अलवर उत्सव का मोनोग्राम भी बनवाया गया। साथ ही अलवर उत्सव का दस वर्षीय कैलेंडर पर्यटन विभाग से जारी करवाया गया।
यह आयोजन इतना भव्य था कि लगभग 25 देशों के राजदूत और राजनयिक इसमें शामिल हुए। राजगढ़ और तिजारा में भी उत्सव का आयोजन किया गया। साल 2003 में तत्कालीन जिला कलक्टर तन्मय कुमार ने 7 फरवरी से 9 फरवरी तक अलवर उत्सव का आयोजन बडे़ स्तर पर किया। साल 2004 में 13 से 15 फरवरी तक अलवर उत्सव तत्कालीन जिला कलक्टर शिवजीराम प्रतिहार के सानिध्य में हुआ। साल 2005 में 11 से 13 फरवरी तक तत्कालीन जिला कलक्टर दिनेश कुमार के निर्देशन में हुआ।
साल 2005 में अलवर उत्सव का नाम बदल कर मत्स्य उत्सव कर दिया गया। साल 2005 में 10 व 11 अक्टूबर को तत्कालीन जिला कलक्टर राजीव सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में मत्स्य उत्सव मनाया गया। साल 2006 में मत्स्य उत्सव 30 सितंबर व 1 अक्टूबर को हुआ। मत्स्य उत्सव-2007 का आयोजन 19 व 20 अक्टूबर को किया गया। इसी दौरान मत्स्य दर्पण स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके बाद 2008 में मेहरानगढ़ विभीषिका के कारण मत्स्य उत्सव स्थगित कर दिया गया।
-एडवोकेट हरिशंकर गोयल, इतिहासकार
| दिन | समय | कार्यक्रम स्थल | कार्यक्रम विवरण |
|---|---|---|---|
| 23 नवंबर (पहला दिन) | सुबह 5:30 बजे | जगन्नाथ मंदिर | महाआरती हुई |
| सुबह 7:30 बजे | नेहरू गार्डन से नगर वन | साइकिल रैली की शुरुआत | |
| शाम 7:00 बजे | कंपनी बाग | सांस्कृतिक कार्यक्रम | |
| 24 नवंबर (दूसरा दिन) | सुबह 10:00 बजे | महाराजा भर्तृहरि पैनोरमा | मेहंदी, रंगोली व पेंटिंग प्रतियोगिता |
| दोपहर 12:00 बजे | महाराजा भर्तृहरि पैनोरमा | महाराजा भर्तृहरि नाटक मंचन | |
| शाम 7:00 बजे | कंपनी बाग | लोकरंग सांस्कृतिक कार्यक्रम | |
| 25 नवंबर (तीसरा दिन) | सुबह 7:00 बजे | पुरजन विहार | योगा व मेडिटेशन |
| दोपहर 2:00 बजे | सागर जलाशय | हैंडीक्राफ्ट व फूड एग्जिबिशन | |
| शाम 4:00 बजे | होपसर्कस से सागर तक | कार्निवाल व पारंपरिक शोभायात्रा | |
| शाम 7:00 बजे | मूसी महारानी की छतरी | सांस्कृतिक कार्यक्रम | |
| 26 नवंबर (चौथा दिन) | सुबह 11:00 बजे | कंपनी बाग | फोटोग्राफी प्रदर्शनी |
| शाम 5:30 बजे | कंपनी बाग | अतुल्य अलवर कार्यक्रम व समापन |
Updated on:
23 Nov 2025 02:17 pm
Published on:
23 Nov 2025 12:47 pm
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