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Siliserh Lake : राजस्थान की यह झील बनी देश की 95वीं रामसर साइट, प्रदेश में अब कितनी हैं? जानें

Siliserh Lake : अलवर की सिलीसेढ़ झील को आर्द्रभूमि पर कन्वेंशन के तहत रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है। जानें राजस्थान में अब कितनी रामसर साइट हो गईं हैं। रामसर साइट घोषित करने के क्या फायदे हैं?

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Rajasthan Siliserh Lake become country 95th Ramsar site How many sites in state Know

अलवर की सिलीसेढ़ झील । फोटो पत्रिका

Siliserh Lake : अलवर की सिलीसेढ़ झील को आर्द्रभूमि पर कन्वेंशन के तहत रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है। यह अलवर के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। देश में यह झील 95वीं रामसर साइट बनी है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास स्थित कोपरा जलाशय को भी रामसर साइट के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। यह उपलŽब्ध जैव-विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा और सतत आजीविका को प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ए€क्स पर बधाई दी।

€क्या है रामसर साइट?

रामसर साइट का अर्थ ऐसी आर्द्रभूमि (गीली भूमि) से है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया जाता है, ताकि उसका संरक्षण, प्रबंधन और संसाधनों का समझदारी से उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। रामसर साइट का दर्जा स्थानीय और वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके लाभ…

1- जैव-विविधता का संरक्षण
2- जल प्रबंधन में सुधार
3- बाढ़ नियंत्रण
4- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना (जैसे कार्बन अवशोषण) प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना।

राजस्थान में अब 5 रामसर साइट

राजस्थान में मौजूदा वक्त 4 रामसर साइट थीं। केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (1981), दूसरी सांभर झील (1990), उदयपुर का बर्ड विलेज मेनार और फलोदी का खींचन गांव शामिल है। इसमें सलीसेढ़ झील और शामिल हो गई है।

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