2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सिलीसेढ़ का गला घोटने वालों पर प्रशासन का एक्शन

सुबह 5 बजे सिलीसेढ़ की सड़कों पर पुलिस ही पुलिस थी। देखते ही देखते एक के बाद एक अतिक्रमण पर जेसीबी चलती गई। तेज आवाज के साथ पूरा एरिया गूंज रहा था। हर कोई देखने के लिए सड़क पर उमड़ पड़ा। मंगलवार को प्रशासन पूरे एक्शन में दिखा। चयनित किए 16 अतिक्रमण तोड़ दिए गए।

3 min read
Google source verification

अलवर

image

susheel kumar

Aug 07, 2024

16 अतिक्रमण तोड़े, 200 को छोड़ा...किसी के कर दिए ‘ठाठ’

- झील के डूब व बहाव क्षेत्र में कई होटल, सर्वे में गिनती के चयन किए

AlwarNews: सुबह 5 बजे सिलीसेढ़ की सड़कों पर पुलिस ही पुलिस थी। देखते ही देखते एक के बाद एक अतिक्रमण पर जेसीबी चलती गई। तेज आवाज के साथ पूरा एरिया गूंज रहा था। हर कोई देखने के लिए सड़क पर उमड़ पड़ा। मंगलवार को प्रशासन पूरे एक्शन में दिखा। चयनित किए 16 अतिक्रमण तोड़ दिए गए। गांव के श्मशान घाट की दीवार तोड़ी तो लोगों ने विरोध कर दिया। कहा कि सिलीसेढ़ में 16 नहीं, 200 से ज्यादा अतिक्रमण हैं। इन तक प्रशासन के हाथ नहीं पहुंच रहे। इसी कारण इनके ठाठ हो रहे हैं। इन्होंने ही सिलीसेढ़ का नक्शा बिगाड़ दिया।

गिड़गिड़ाते रहे होटल मालिक...प्रशासन चलाता रहा बुलडोजर

नटनी हेरिटेज होटल पर पहले दीवार गिराने अधिकारी पहुंचे। करीब 4 घंटे का समय देने के बाद फिर से टीम निर्माणाधीन भवन गिराने पहुंची। काफी देर तक प्रशासन मंथन करता रहा, लेकिन बाद में कार्रवाई शुरू हो गई। नए भवन के पार्टीशन तोड़ दिए गए। भवन स्वामी बार-बार कार्रवाई रुकवाने का आग्रह करता रहा। जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई दिन में चल रही थी, जो प्रशासन को शाम को चार बजे मिली। अब इस पर सुनवाई बुधवार की सुबह होगी। उसके बाद प्रशासन अपनी कार्रवाई करेगा।

संसाधन नहीं जुटाए गए...कटघरे में अफसर

प्रशासनिक टीम को 16 अतिक्रमण गिराने थे। इससे पहले सभी को नोटिस दिए गए। अतिक्रमण का आकार-प्रकार सभी को पता थे। उसी हिसाब से गिराने के लिए संसाधन जुटाने थे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसी कारण एक बड़े होटल का ढांचा नहीं गिराया गा। जंगल लैप होटल में जल संसाधन खंड के एक्सईएन संजय खत्री प्रवेश किए लेकिन कुछ ही देर बाद लौट आए, जबकि दीवार से झील का पानी टकरा रहा था।

इन अतिक्रमण पर हुई कार्रवाई

- नटनी हेरिटेज : खसरा नंबर 754, 753 पर चारदीवारी व निर्माणाधीन बिल्डिंग।

- इंदु लैंडमार्क : खसरा नंबर 803, 804, 901 पर चारदीवारी व अस्थाई कमरा।

- ललित कुमार : खसरा 786,787 पर चारदीवारी।

- अनंत कुमार खंडेलवाल: 785 खसरे पर चारदीवारी।

- रविंद्र गर्ग : खसरा नंबर 89, 92 पर चारदीवारी।

- दीपक खंडेलवाल, 708 खसरे पर चारदीवारी और ग्रेवल सड़क।

- प्रेम पटेल : 738 खसरे पर चारदीवारी।

- कुम्हेर : 892 खसरे पर चारदीवारी।

- मेधावान : 58 खसरे पर तारबंदी।

- मिताली जैन : अतिक्रमण

- पूजा रानी : 783,784 खसरे पर चारदीवारी।

- चेतराम : ग्रेवल सड़क

- प्रेमलता खंडेलवाल : 697,698 खसरे पर चारदीवारी व प्लॉटिंग।

- दिव्यांशी वर्मा : 579 खसरे पर ग्रेवल सड़क।

- दीपक खंडेलवाल : चारदीवारी।

- पूरण पंसारी : चारदीवारी व कमरा।

सिलीसेढ़ ने बताई आपबीती

- सिलीसेढ़ झील के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण अपने आप नहीं हुए। इसके दोषी वहां के ग्रामीण नहीं, बल्कि जल संसाधन खंड, यूआईटी, प्रशासन व वन विभाग है। किसी ने रजिस्ट्री की तो किसी ने एनओसी दी और झील के बहाव से लेकर डूब क्षेत्र में होटल बना डाले। दीवारें खींच डाली।

- मंगलवार को प्रशासन जागा, पर अधूरे संसाधन लेकर पहुंचा। यही कारण रहा कि निर्माणाधीन हेरिटेज होटल को गिराने के लिए संसाधन नहीं लेकर गए।

- प्रशासनिक अफसरों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगा दिए और विरोध भी कर दिया। कहा कि प्रभावशाली लोगों के पानी में बने होटल छोड़ दिए और गरीबों के श्मशान घाट की दीवारें तक तोड़ डालीं। कई लोगों के ठाठ हो गए।

यूआईटी का अधिकार क्षेत्र, कार्रवाई वही करेंगे

सिलीसेढ़ यूआईटी के अधिकार क्षेत्र में आता है। नटनी हेरिटेज समेत कई होटल यूआईटी ने बनवा दिए। भू परिवर्तन कर दिया गया। यूआईटी के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा था। कहा, झील के डूब क्षेत्र में बड़े होटल बने हैं लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की। जल संसाधन विभाग यूआईटी पर पूरा मामला डाल रहा है। यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं। यूआईटी का तर्क है कि होटलों को कई बार नोटिस दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सिलीसेढ़ झील के बहाव व डूब क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं हो सकता लेकिन यहां जिम्मेदारों ने कब्जा करा दिया। कार्रवाई प्रशासन ने शुरू की, यह अच्छा संकेत है। अब अन्य अतिक्रमण भी हटाए जाएं।

- राजेंद्र तिवारी, अध्यक्ष, नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव संरक्षण समिति

जल संसाधन खंड को नोटिस के बाद हमने जवाब दिया था, लेकिन फिर भी कार्रवाई कर दी। झील के बहाव क्षेत्र में हमारी जमीन नहीं आती। सरकार के साथ खुद हमारा एमओयू है। अब मामले में कोर्ट की ओर से निर्णय लिया जाना है।

- हितेंद्र जैन, संचालक, नटनी हेरिटेज

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो गई है। बाकी बची कार्रवाई बुधवार को की जाएगी। अन्य अतिक्रमण के लिए भी सर्वे कराएंगे।

- बीना महावर, एडीएम सिटी

झील के बहाव क्षेत्र में आने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। कुछ होटल झील के डूब एरिया में हैं, उन्हें यूआईटी ने अनुमति दी है। ऐसे में यूआईटी को कार्रवाई करनी चाहिए।

संबंधित खबरें

- संजय खत्री, एक्सईएन, जल संसाधन खंड