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सरिस्का की खुशहाली पर कौन लगा रहा ब्रेक

टाइगर रिजर्व सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का दो साल में भी निर्धारण नहीं हो सका है। इस कारण वनकर्मियों व ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ रहा है, वहीं आसपास के ग्रामीणों के रोजगार पर भी ताला लग रहा है। इससे सरिस्का की खुशहाली पर ब्रेक लगने के साथ ही पर्यटकों की सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
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अलवर

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Prem Pathak

•

Updated: 1 Jul 2023, 11:51 PM IST

सरिस्का की खुशहाली पर कौन लगा रहा ब्रेक

सरिस्का की खुशहाली पर कौन लगा रहा ब्रेक


अलवर. टाइगर रिजर्व सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन इएसजेड दो साल भी सरकारी मकड़जाल से बाहर नहीं आ सका है। सरिस्का की सीमा तय नहीं होने का सबसे ज्यादा असर आसपास के ग्रामीणों पर पड़ा है। फिलहाल इएसजेड का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास विचाराधीन है। इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण नहीं होने का सबसे बड़ा असर आसपास के ग्रामीणों के रोजगार पर पड़ा है। वहीं पर्यटकों की बेहतर सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। वनकर्मियों एवं ग्रामीणों के बीच विवाद एवं वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध खनन जैसी अनेक समस्याओं का कारण भी इएसजेड का समय पर निर्धारण नहीं होना है।
प्रदेश के मुकंदरा हिल्स समेत अन्य बाघ अभयारण्य का सेंसेटिव जोन का निर्धारण पहले ही हो चुका है। इससे वहां रोजगार एवं पर्यटकों की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन प्रदेश के बड़े एवं पुराने टाइगर रिजर्व सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पूर्व में यह लंबे समय तक राज्य सरकार के पास विचाराधीन रहा, कुछ महीनों पहले यह प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया, लेकिन वहां भी इस पर निर्णय नहीं हो पाया। जबकि केन्द्रीय पर्यावरण एवं जलवायु मंत्री भूपेन्द्र यादव खुद अलवर में जनसभा में सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप देने की बात कह कर गए थे।

इको सेंसेटिव जोन में देरी का यह पड़ रहा प्रभाव

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने में हो रही देरी का रोजगार, राजस्व एवं पर्यटकों की सुविधाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके कारण सरिस्का के आसपास करीब 70 मार्बल की खानें बंद हैं। यदि इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण हो तो ये खानें शुरू हो सके और इनमें आसपास के हजारों लोगों को रोजगार मिल सके। वहीं सरिस्का की सीमा तय नहीं होने का बड़ा असर पर्यटकों की सुविधा पर भी पड़ा है। इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण होने पर सरिस्का के आसपास अच्छे होटल का निर्माण हो सकेगा। इससे पर्यटकों में सरिस्का के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।

क्या है इको सेंसेटिव जोन

शहरीकरण और अन्य विकासात्मक गतिविधियों के प्रभाव को कम करने के लिये संरक्षित क्षेत्रों से सटे क्षेत्रों को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रेल 2023 में अपने 2022 के शासनादेश को संशोधित किया, जिसके तहत राष्ट्रीय उद्यानों या वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास कम से कम 1 किलोमीटर के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र की स्थापना की आवश्यकता जताई गई थी।

फैक्ट फाइल
सरिस्का को वन्यजीव आरक्षित भूमि घोषित किया- 1955

सरिस्का को बाघ परियोजना योजना रिजर्व का दर्जा दिया- 1978
सरिस्का का क्षेत्रफल- 1213 वर्ग किलोमीटर

सरिस्का का कोर एरिया- 881 वर्ग किलोमीटर
सरिस्का में बाघ- 28

सरिस्का में भालू- 3
सरिस्का में पैंथर- 200 से ज्यादा

सरिस्का की सीमा में गतिविधियाें पर रोक- एक किलोमीटर

खुल सकेंगी बंद खानें

इको सेंसेटिव जोन के निर्धारण के अभाव में सरिस्का के आसपास कई खानें बंद हैं। इसका निर्धारण होने पर बंद खानें खुलने की उम्मीद है।
राजेन्द्र चौधरी

खनि अभियंता अलवर