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मत्स्य विश्वविद्यालय को बनाने में है 900 करोड़ की जरूरत, लेकिन सरकार ने दिए मात्र 12 करोड़, कैसे पूरा होगा काम

मत्स्य विश्वविद्यालय के भवन का निर्माण पूरा होने मे अभी कई साल लगेंगे।
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अलवर

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Prem Pathak

Jul 12, 2018

Very less budget alloted for Matsya university construction work

मत्स्य विश्वविद्यालय को बनाने में है 900 करोड़ की जरूरत, लेकिन सरकार ने दिए मात्र 12 करोड़, कैसे पूरा होगा काम

धर्मेन्द्र अदलक्खा

अलवर. शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले अलवर जिले का राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय नए शिक्षा सत्र में भी अपने भवन में नहीं चल पाएगा।

वर्तमान में विश्वविद्यालय कला महाविद्यालय के कन्या छात्रावास में संचालित हो रहा है। जिसके पास उत्तर पुस्तिकाएं रखने तक को स्थान नहीं है। हल्दीना में विश्वविद्यालय के नाम 200 बीघा जमीन आवंटित की गई है जिस पर मात्र 9 करोड़ की लागत से प्रशासनिक और परीक्षा भवन का निर्माण चल रहा है। सरकार ने भी अब तक विश्वविद्यालय के लिए मात्र एक करोड़ 6 लाख की राशि भेजी है, इसकी स्वीकृत राशि के लिए भी विश्वविद्यालय ने सरकार को पत्र लिखा है। इस पूरे सेटअप पर 900 करोड़ की आवश्कता है। सरकार प्रयास इसी गति से चलते रहे तो नियत समय में विश्वविद्यालय भवन का निर्माण मुश्किल है।

भवन निर्माण में सबसे बड़ी बाधा सरकार की ओर से नाममात्र का बजट दिया जाना है।भवन निर्माण की गति से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विश्वविद्यालय भवन का निर्माण पूरा होने में कई साल लगना तय है। मालाखेड़ा के समीपवर्ती ग्राम हल्दीना में निर्माणाधीन राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में प्रशासनिक व परीक्षा ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। हल्दीना गांव में पत्रिका रिपोर्टर ने मौके पर जाकर देखा कि इतने बड़े 200 बीघा के क्षेत्र में दो ब्लॉक के बनने के बाद भी यहां विश्वविद्यालय चलने की स्थिति में नहीं आ पाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 900 करोड़ से अधिक की आवश्यकता होगी। विश्वविद्यालय के इस जमीन पर दूर- दूर तक कोई पेड़ तक नजर नहीं आ रहा है।

यहां थोड़ी सी बरसात होने पर काम रोकना पड़ता है। यहां बरसात में पानी भर जाता है। इस भवन को बनाने में 100 श्रमिक लगे हुए हैं और दोनों ब्लॉक में बेसमेंट का कार्य चल रहा है।

यहां पहुंचना हो रहा मुश्किल

विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन भवन परिसर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। परिसर के भीतर निर्माण सामग्री पहुंचाना परेशानी का कारण है क्योंकि यहां पक्की सडक़ नहीं है। यहां पहुंचने के लिए सडक़ बन रही है जिसका धीमी से कार्य चल रहा है। इसके लिए ठेकेदार को 26 फरवरी 2018 को ठेका दिया गया जिसका काम 12 माह में पूरा होना है। वर्तमान परिस्थतियों को देखकर नहीं लगता कि यह दो साल में भी पूरा हो पाएगा। यही हालात रहे तो विश्वविद्यालय हल्दीना स्थित भवन में कई वर्षों तक नहीं चल पाएगा।