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सरिस्का के आस-पास इन 15 अवैध होटल-रेस्टोरेंट पर होगी करवाई? सर्वे में हुआ खुलासा 

इन पर गाज गिरना तय है। होटल रेस्टोरेंट संचालक अपने बचाव के लिए नेताओं से लेकर उच्चाधिकारियों के पास दौड़ लगा रहे हैं। वह अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखा रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही। जानकारों का कहना है कि यदि अफसरों ने बचाने की कोशिश की तो वह भी कार्रवाई की जद में आएंगे।

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सरिस्का के आसपास अवैध रूप से बने होटल-रेस्टोरेंट मामले का सर्वे लगभग पूरा हो चुका है। संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर होने बाकी हैं। वन विभाग की ओर से एनजीटी में 4 जुलाई को यह रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि सिलीसेढ़, डढ़ीकर के करीब 15 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट, मैरिज होम आदि अवैध रूप से बनाए गए हैं।

इन पर गाज गिरना तय है। होटल रेस्टोरेंट संचालक अपने बचाव के लिए नेताओं से लेकर उच्चाधिकारियों के पास दौड़ लगा रहे हैं। वह अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखा रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही। जानकारों का कहना है कि यदि अफसरों ने बचाने की कोशिश की तो वह भी कार्रवाई की जद में आएंगे।

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एनजीटी के आदेश पर राजगढ़-अजबगढ़ रेंज में भी सर्वे चल रहा है। प्रशासन, वन विभाग, पुलिस, खान विभाग, पीडब्ल्यूडी कई विभाग सर्वे में लगे हैं। बताया जा रहा है कि यहां की सर्वे रिपोर्ट भी लगभग फाइनल हो गई है। इस क्षेत्र में भी 25 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। यहां वन विभाग के कई अफसर ने होटल रेस्टोरेंट रिसॉर्ट बनाए हुए हैं।

कुछ अफसर रिटायर हो चुके हैं, तो कुछ अभी विभिन्न जिलों में नौकरी कर रहे हैं। इस मामले में सरकार भी अपने स्तर से बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि अजबगढ़ व राजगढ़ क्षेत्र में चार सितारा से लेकर 7 सितारा होटल भी सर्वे की जद में हैं।

वह सरिस्का के आसपास या सीटीएच की जमीन पर बने हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट वन विभाग तैयार कर रहा है। वहां से आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन करेंगे। आगे जो आदेश एनजीटी के मिलेंगे, उसका पालन किया जाएगा।

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एनजीटी में याचिका दायर की गई थी कि सरिस्का के आसपास के एरिया में होटल रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट से लेकर कई प्रतिष्ठान बिना अनुमति के बनाए गए हैं। साथ ही सीटीएच की भूमि वन विभाग के नाम दर्ज नहीं हो पाई है। इसका रकबा करीब 88 हजार हैक्टेयर है।

अगर यह जमीन वन विभाग के नाम हो जाती तो शायद इस पर अतिक्रमण नहीं हुए होते। इसे लेकर एनजीटी में सुनवाई चल रही है। इस प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो सिलीसेढ़, राजगढ़, डढ़ीकर, अजबगढ़ रेंज, ताल वृक्ष रेंज व आसपास के एरिया में चार विभागों ने सर्वे शुरू किया।

अलवर तहसील के अंतर्गत आने वाले एरिया की सर्वे रिपोर्ट लगभग फाइनल हो गई है। वन विभाग इस पर काम कर रहा है। प्रशासन से भी वन विभाग राय लेगा, उसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को जाएगी। रिपोर्ट को लेकर प्रतिष्ठान संचालकों में हड़कंप मचा है।