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जाट आरक्षण पर बोले मुख्यमंत्री अब सरकार के हाथ में कुछ नहीं

जाट आरक्षण के मुद्दे पर सरकार ने हाथ खड़े किए
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hariyana cm Manohar Lal Khattar

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(चंडीगढ): रोहतक जिले के जसिया में शनिवार को आयोजित जाट महासम्मेलन में आरक्षण को लेकर आगामी 16 अगस्त से फिर आंदोलन छेड़ने के ऐलान पर रविवार को हरियाणा सरकार ने हाथ खडे कर दिए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रोहतक में कहा कि जाट आरक्षण का मुद्दा अब सरकार के हाथ में नहीं रहा है। सरकार ने अपना कार्य समय पर कर दिया था।

सीएम ने कहा कि सरकार ने विधानसभा में जाट आरक्षण के लिए विधेयक पारित कर दिया था। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है और हमारे वकील पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने संबंधित पक्ष को भी कहा है कि वह भी अपने वकीलों को अदालतों में खड़ा करें, ताकि वहां किसी प्रकार की कोई कमी न रहे। यह लड़ाई सब को मिलकर लड़नी होती है।


रोहतक में पत्रकारों से बातचीत में जाट नेताओं के मुख्यमंत्री व मंत्रियों के कार्यक्रम न होने देने के ऐलान के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। लोकतंत्र में यह संभव नहीं है कि कोई किसी की बात को नहीं मानेगा या नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखेगी।


उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में जाट नेताओं की सभी मांगें पूरी हो गई हैं। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जिसका नुकसान हुआ था, उसकी भरपाई एक महीने के अंदर-अंदर कर दी गई थी। आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के आश्रितों को नौकरी देने की बात थी, तो नौकरी दे दी गई। मुआवजा देना था, मुआवजा भी दे दिया। अब कोई मामला सरकार के स्तर पर नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि कुछ साधारण सी धाराओं में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को रियायत देने की सिफारिश उच्च न्यायालय से की गई थी, जिस पर न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई।


किसान अवकाश आंदोलन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ऐसे किसान संगठन और ऐसे नेता हैं, जिनका कोई जनाधार नहीं है। विशेषकर हरियाणा में ऐसे नेता कुछ लोगों के साथ जबरदस्ती करके उनके उत्पादों का नुकसान कर रहे हैं। ये वास्तव में किसान के खिलाफ काम कर रहे हैं।


किसान अपनी प्रतिदिन की रोजी-रोटी कमाने के लिए सब्जी, दूध आदि बेचता था। अगर ये नेता उनके शीघ्र खराब होने वाले उत्पादों को 10 दिनों तक नहीं बेचने देंगे तो ये किसान का नुकसान होगा। इस प्रकार के आंदोलन का कोई अर्थ नहीं है, जो किसानों का नुकसान कर रहा हो। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों की आवाज को सुना है। उनके कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम व योजनाएं चलाई हैं। उन्होंने कहा कि जो किसानों के साथ गलत काम करेगा, उनसे जबरदस्ती करके उन्हें रोकेगा, उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।