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रिंग रोड में 94 करोड़ के घोटाले का आरोप, 5 हजार पेज के दस्तावेजों के साथ कोर्ट में परिवाद पेश

Big Scam in Ring Road: आरटीआई कार्यकर्ता (RTI Activist) ने ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने पेश किया परिवाद (Filled Complaint), कहा- जितने समय की गारंटी (Guarantee) अवधि थी उतना समय निर्माण कार्य में ही लगा दिया, विभाग की मिलीभगत से 23 करोड़ रुपए अधिक किया गया भुगतान

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RTI activist complaint in Court

Big Scam in Ring road

अंबिकापुर. शहर में बने रिंग रोड में 94 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता व अधिवक्ता डीके सोनी ने 5 हजार पेजों के दस्तावेजों के साथ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में ठेकेदार एवं अधिकारियों के विरुद्ध अपराध दर्ज करने हेतु धारा 156(3) के तहत परिवाद प्रस्तुत किया है।

दाखिल परिवाद में दस्तावेजों के जरिए घोटाले के कई सबूत दिए गए हैं। इस परिवाद पर सुनवाई की तिथि 12 अक्टूबर निर्धारित की गई है।


आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया है कि छत्तीसगढ़ रोड डवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रायपुर द्वारा 10.808 किलोमीटर के रिंग रोड निर्माण हेतु श्री किशन एंड कंपनी रायपुर को ठेका देते हुए 70 करोड़ 60 लाख 6250 रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया था तथा 1 वर्ष की समय अवधि प्रदान की गई थी।

रिंग रोड निर्माण प्रारंभ हुए लगभग 3 वर्ष से काफी समय हो गया और ठेकेदार की समयावधि समाप्त हो गई लेकिन आज तक कार्य कम्पलीट नहीं हो पाया है। रिंग रोड को पूरा नहीं करने का कारण ठेकेदार द्वारा गारंटी अवधि को समाप्त करने का भी खेल खेला जा रहा है।

खेल कुछ इस तरह है कि जितनी गारंटी अवधि है उतना समय निर्माण कार्य में लगा दिया जाए। इससे गारंटी अवधि समाप्त हो जाएगी और जमा सिक्योरिटी राशि लेकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा।

उक्त कार्य श्री किशन एंड कंपनी को दिया गया है। लेकिन श्री किशन एंड कंपनी द्वारा स्वयं कार्य न करके पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सूरजपुर के ठेकेदार शंकर अग्रवाल प्रो. जगदंबा कंस्ट्रक्शन को दे दिया गया है।

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इसके कारण भी उक्त कार्य काफी घटिया स्तर का कराया गया है एवं जो ड्राइंग्स डिजाइन स्वीकृत हुई थी, उसके अनुसार कार्य नहीं किया गया है। वहीं प्रशासकीय स्वीकृति के अनुरूप जिन कार्यों को किया जाना था, उनमें से अधिकांश नहीं किए गए हैं। वर्तमान स्थिति ऐसी है कि अभी ही रिंग रोड की हालत खराब हो गई है।


वर्क ऑर्डर से 23 करोड़ ज्यादा का भुगतान
आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि रिंग रोड में विभाग द्वारा ठेकेदारों को 94 करोड़ से अधिक का भुगतान कर दिया गया है, जबकि वर्क ऑर्डर 70 करोड़ 60 लाख का था। २३ करोड़ से भी अधिक का भुगतान अधिकारियों की मिलीभगत से हो गया है जो शासकीय राशि का खुले रूप से गबन है, यह एक आपराधिक कृत्य है।

रिंग रोड की समयावधि 30 वर्ष की है, इसका डीपीआर में उल्लेख है, लेकिन रिंग रोड अभी पूर्ण हुआ नहीं है और जगह-जगह क्रैक आना चालू हो गया है क्योंकि रिंग रोड में सीवीआर सब ग्रेड घटिया क्वालिटी का डाला गया है, इसके लिए 4 करोड़ की राशि अलग से निकाल ली गई है। रिंग रोड का डीपीआर के अनुसार कार्य नहीं किया गया है।

आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा विभिन्न तथ्यों के साथ शिकायत आवेदन थाना अंबिबकापुर तथा पुलिस अधीक्षक सरगुजा को किया गया था।

लेकिन पुलिस की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं करने के कारण वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी के माध्यम से आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी ने रिंग रोड निर्माण में संलग्न सभी अधिकारियों के विरुद्ध शासकीय राशि का षडयंत्र पूर्वक योजनाबद्ध तरीके से गबन करने के संबंध में 5000 पेजों के साथ धारा 156(3) के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में अपराध पंजीबद्ध किए जाने हेतु 7 अक्टूबर को आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इसमें 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई हेतु तिथि निर्धारित की गई है।

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जो कार्य नहीं कराया, उसकी भी राशि निकाल ली
ठेकेदार द्वारा रिंग रोड में जो कार्य नहीं कराया गया है, उसकी राशि भी निकाल ली गई है। जैसे रिंग रोड के दोनों तरफ 3.5-3.5 फीट का फुटपाथ बनाना था मौके पर नहीं बनाया गया है उसके लिए 5 करोड़ 27 लाख का प्रावधान था उसे भी ठेकेदार ने निकाल लिया है तथा नाली के ऊपर फुटपाथ दिखाया गया है जबकि ड्राइंग डिजाइन में नाली अलग है, फुटपाथ अलग है।

स्टीमेट के अनुसार सड़क नहीं बनाया गया है जिसके कारण गाड़ी चलने पर लहरा रही है तथा बराबर लेबल नहीं किया गया है। घटिया काम करा कर पूरा पैसा निकाल लिया गया है। जितनी मोटाई की ढलाई सड़क की करनी थी वह नहीं की गई है। स्टीमेट के अनुसार 8 कलवर्ट बॉक्स का निर्माण होना था, 9 बड़े जंक्शन का प्रावधान था, 20 छोटे जंक्शन भी बनने का प्रावधान था जो कि मौके पर नहीं बनाया गया है उसकी राशि भी निकाल ली गई है।

जो नाली बनाई गई है, वह काफी है, क्योंकि बहुत जगह नाली की जो ढलाई की गई है वह दब गई है तथा कभी भी दुर्घटना हो सकती है। रिंग रोड से पानी की निकासी की व्यवस्था सही तरीके से प्रावधान के अनुसार नहीं किया गया है। इस कारण रिंग रोड बरसात में स्विमिंग पुल बन जाता है तथा रिंग रोड के आसपास के घरों में पानी भर जाता है। जितने का मेजरमेंट प्रस्तुत कर राशि निकाली गई है उतने का कार्य नहीं किया गया है।

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ये कार्य भी नहीं किए गए
ड्राइंग डिजाइन के अनुसार पाइप लाइन बिछानी थी, जिससे कई तरह के वायर का विस्तार होता है लेकिन रिंग रोड के बीच में जो डिवाइडर बना है, उसमें कहीं भी पाइप लाइन नहीं है। बिजली के खंभे के तार भी मिट्टी में दबाकर लगाए गए हैं। उसकी भी राशि ठेकेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर निकाल ली है।

स्टीमेट के अनुसार 94 लाख 52हजार का प्रोटेबल बेरिकेट लगाना था जिसे ठेकेदार ने नहीं लगाया है। उसकी राशि भी ठेकेदार ने प्राप्त कर ली है। रिंग रोड के दोनों तरफ कर्व विथ चैनल बनाने का प्रावधान था जो कि मौके पर नहीं बनाया गया है उसकी भी राशि निकाल ली गई है है। स्टीमेंट के अनुसार रिंग रोड में 6 बार पेंट करना है तथा एरो का निशान बनाना है। इसकी राशि भी निकल गई है।

इसके अलावा स्टील रेलिंग, पौधरोपण, सहित अन्य कई कार्य में भारी गड़बड़ी कर पूरी राशि निकाल गई है। रिंग रोड की चौड़ाई 24 मीटर होनी चाहिए थी जो मौके पर नहीं है, रिंग रोड के दोनों साइड खरसिया चौक से बिलासपुर चौक दर 9 मीटर के यानी दोनों साइड 18 मीटर 35 सेंटीमीटर कांक्रीट करना था तथा अन्य जगह 30 सेंटीमीटर कांक्रीट करना था लेकिन ठेकेदार द्वारा नहीं किया गया।

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