
Surguja University
अंबिकापुर. सरगुजा विश्वविद्यालय अब कार्य परिषद के निर्णयों को भी बदलने लगा है। शाब्दिक बदलाव के साथ कार्य परिषद के सदस्यों को ठेंगा दिखा दिया गया। सरगुजा विश्वविद्यालय के कारनामों का खुलासा प्राचार्य के लिखे पत्रों से हुआ है। सूरजपुर के शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एसएस अग्रवाल ने सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखा है, जिसकी प्रति कुलाधिपति राज्यपाल को प्रेषित है।
26 मार्च 2018 को हुई कार्य परिषद मेें राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय के स्वशासी दर्जा की अवधि पर चर्चा हुई थी। कार्य परिषद के सदस्यों ने निर्णय लिया था कि कॉलेज स्वशासी की प्रक्रिया की शीघ्रातिशीघ्र पहल करे। इस निर्णय को कार्य परिषद की बैठक के बाद सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बदल दिया।
सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कार्य परिषद के सदस्यों के निर्णय को बदलते हुए राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर को दो महीने का समय स्वायत्ता के लिए दिया। दो महीने में स्वायत्तता विस्तार नहीं होने की स्थिति में सरगुजा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम संचालित होने का आदेश जारी कर दिया है। प्राचार्य ने पत्र में लिखा है कि सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा दर्शाया गया निर्णय कार्य परिषद की बैठक के दौरान नहीं लिया गया था।
सरगुजा विवि विधिक सलाहकार की मानदेय की नियुक्ति पर विचार किया गया। कार्य परिषद ने सलाहकार नियुक्त करने का अनुमोदन किया। सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन पद का अनुमोदन नहीं कराकर बल्कि नागेन्द्र तिवारी के नाम का अनुमोदन कराया। कार्य परिषद में मानदेय और पद का निर्धारण होना चाहिए था।
सरगुजा विवि प्रबंधन ने पहले से ही व्यक्ति नाम का निर्धारण कर लिया था। सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तीसरे निर्णय में फेरबदल करते हुए संविदा कर्मचारियों के निर्णय के मामले में कार्य परिषद के साथ छल कर दिया। विवि कर्मचारियों द्वारा दायित्व निर्वहन में विलम्ब किये जाने के सन्दर्भ में विचार किया गया।
कार्यपरिषद ने दोषी कर्मचारियों को नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया था। सरगुजा विवि ने कर्मचारियों का निर्णय बदलते हुए विलम्ब की पुनरावृत्ति होने पर निलम्बित का फैसला दर्ज कर लिया। प्राचार्य ने पत्र के माध्यम से अगली कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों के बीच तथ्यों को रखने तथा संशोधन की मांग किया है।
समय से एजेंडा उपलब्ध कराए विवि
कुलसचिव को लिखे पत्र में प्राचार्य एसएस अग्रवाल ने अनुरोध किया है कि कार्य परिषद के सदस्यों को समय से एजेन्डा उपलब्ध कराया जाये। एजेंडा उपलब्ध होने की स्थिति में सदस्य बैठक में तैयारी के साथ शामिल होंगे। २२ मई को लिखे पत्र की प्रति कुलाधिपति राज्यपाल को उपलब्ध करा दी गई है।
'पुन: परीक्षणोपरांत' से किया खेल
सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग तथा विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर, प्राचार्य, सह प्रोफेसर एवं सहायक प्रोफेसर की परिवीक्षा अवधि मामले में आत्मघाती बदलाव कर दिया। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पुन: परीक्षणोपरांत शब्द जोड़ दिया है।
पुन: परीक्षणोपरान्त शब्द के माध्यम से सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन परिवीक्षा अवधि मामले में खेल करना शुरू कर दिया है जबकि कार्य परिषद की बैठक में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण करने सभी प्रोफेसर, प्राचार्य, सह प्रोफेसर एवं सहायक प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर दिया। सभी की संतोषप्रद चरित्रावली है।
परिवीक्षा अवधि समाप्ति की कार्यवाही नियमानुसार शीघ्र पूरी की जाये का निर्णय लिया गया। प्राचार्य एसएस अग्रवाल ने पत्र के माध्यम से कहा है कि कार्य परिषद की बैठक में किसी भी सदस्य ने पुन: परीक्षणोपरान्त शब्द का प्रयोग नहीं किया है।
शाब्दिक परिवर्तन कर बदले जा रहे निर्णय
कार्य परिषद के निर्णयों को सरगुजा विवि प्रबंधन दूसरा रूप दे दे रहा है। शाब्दिक परिवर्तन कर निर्णयों को बदला जा रहा है। कार्रवाई के मिनट्स नहीं लिखे जाने से सदस्यों की बात निर्णय में शामिल नहीं हो पा रही है।
डॉ. ज्योति सिन्हा, कार्य परिषद सदस्य
निर्णय बदले गए हैं तो इसे देखना पड़ेगा
कार्य परिषद के निर्णय बदले गये हैं तो इसे देखना पड़ेगा। 28 मई को होने वाली कार्य परिषद का एजेंडा अभी तक नहीं मिला है। आगामी बैठक के सन्दर्भ में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता है।
टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष
Published on:
26 May 2018 05:57 pm
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