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आप भी जानिए, गार्जियन को किस तरह लूटते हैं प्राइवेट स्कूल, मोर्चा खोलकर दी गई ये चेतावनी

गांधी चौक पर एकत्रित होकर अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन, बताया-कैसे लूट रहे अभिभावक

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Protest against private schools

Union of guardian

अंबिकापुर. प्राइवेट स्कूलों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि बच्चों के गार्जियन हर साल इनके द्वारा लूटे जा रहे हैं। कभी इनके द्वारा मनमानी फीस बढ़ा दी जाती है तो कभी किताबें उनके द्वारा निर्धारित दुकानों से ही लेने दबाव बनाया जाता है। वार्षिकोत्सव के नाम पर 500 रुपए तथा स्मार्ट क्लास के नाम पर प्रतिमाह 300 रुपए की वसूली की जाती है।

ऐसे कई मद उनके द्वारा हर वर्ष तैयार किया जाता है जिससे अभिभावकों की जेब काट सकें। इसी को लेकर मंगलवार को अभिभावक संघ द्वारा गांधी चौक पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान संघ ने इस वर्ष शुल्क नियामत कमेटी के गठन करने तथा बढ़ा हुआ शुल्क वापस लेने की मांग की है। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।


अभिभावक संघ ने मंगलवार को निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ गांधी चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 12 बजे विरोध प्रदर्शन करते हुए सर्वजीत पाठक ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा इस वर्ष 200 से 500 रुपए की वृद्धि कर दी और उसपर कोई अंकुश लगाने वाला नहीं है। जबकि नियमानुसार इन्हें पहले स्कूल के अभिभावक कमेटी से इसके लिए अनुमति लेनी थी।

किस अभिभावक कमेटी से अनुमति ली गई, इसकी कोई जानकारी अब तक किसी को नहीं दी गई है। उन्होंने अभिभावक संघ के मंच से बढ़े हुए शुल्क को वापस करने की मांग की। इस दौरान निलेश सिंह ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा पाठ्यक्रम में बदलाव कर निजी पुस्तक प्रकाशकों के माध्यम से अनाप-शनाप दर के किताबें कुछ चुनिंदा दुकानों में उपलब्ध कराई जा रही है।

जबकि पूर्व में ही केन्द्र सरकार द्वारा सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें स्कूलों में अनिवार्य रूप से चलवाने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की वजह से आज तक एनसीईआरटी की किताबें स्कूलों में लागू नहीं की जा सकी हैं। निजी स्कूल में वार्षिक उत्सव के नाम पर 500 रुपए प्रति छात्र एवं स्मार्ट क्लास के नाम पर 300 रुपए प्रतिमाह वसूला जा रहा है। इसपर तत्काल रोक लगाना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन करने के बाद अभिभावक संघ ने मुख्यमंत्री व कलक्टर के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भारत सिंह सिसोदिया, कैलाश मिश्रा, मधुसूदन शुक्ला, राजेश सिंह देवा, हरमिंदर सिंह, शैलेष सिंह, मो. यासिन खान, छोटु थॉमस, शुभांकर पाण्डेय, संजीत सिंह, विकास कुमार वर्मा, अंजनी दुबे, भूपेश यादव, वेदांत तिवारी, मनोज सिंह, आकाश गुप्ता, किशोर सिंह बघेल, अमित जायसवाल, पुष्पा सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।


न पेयजल और न कैमरा
निलेश सिंह ने कहा कि निजी स्कूलों में न तो पेयजल औरा न ही सीसी टीव्ही कैमरा लगाया गया है। जबकि बिना अनुमति के अंदर तक लोग प्रवेश करते हैं और किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो जाने के बाद फिर स्कूल अपना राग अलापेंगे। सभी निजी स्कूलों में साफ-सफाई हेतु विशेष कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक निजी शैक्षणिक संस्थानों में पालक संघ का गठन किया जाना चाहिए। शुल्क वृद्धि हेतु कमेटियों का गठन अभिभावकों के बीच से किया जाना चाहिए।


ऑफिसरों के बच्चे पढ़ते है इसलिए नहीं होती कार्रवाई
निजी स्कूलों में बड़े अधिकारियों के बच्चों के पढऩे की वजह से अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। लेकिन अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सात दिवस के अंदर अगर अभिभावक संघ की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


अभिभावकों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं
अभिभावक संघ के आलोक दुबे ने कहा कि अभिभावकों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। स्कूलों की मनमानी इस कदर बढ़ी हुई है कि जब मन करता है ये बच्चों पर दबाव बनाने लगते हैं। बिना पालक संघ की अनुमति के ही मनमर्जी से शुल्क में वृद्धि कर दी जाती है और अगर कोई इसका विरोध करता है तो उसे धमकाया जाता है।

पाठ्यक्रम में बदलाव कर कुछ चुनिंदा दुकानों के माध्यम से किताबें बिक्री करने की बात अब आम हो गई है। कुछ निजी स्कूलों द्वारा स्कूल में ही डायरी व प्रोजेक्ट फाइल बेचने के नाम पर विद्यार्थियों से लम्बी-चौड़ी शुल्क की वसूली की जाती है।