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मंडराता खतरा: चीनी तरक्की से घबराकर इस सीक्रेट मिशन पर जुटा अमरीका

पिछले कुछ दशकों में चीन का इतनी तेजी से आर्थिक और सैन्य विकास हुआ है कि अब वह दुनिया में महाशक्ति की तरह उभरता नजर आ रहा है, जो अमरीका को पसंद नहीं आ रहा।
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American armed forces

मंडराता खतरा: चीनी तरक्की से घबराकर इस सीक्रेट मिशन पर जुटा अमरीका

आज भी अमरीका के पास इतने परमाणु हथियार हैं कि वह पृथ्वी को 10 बार तबाह कर सकता है। फिर भी वह और एटम बम और मिसाइलें बनाना चाहता है। क्या चीन के अभूतपूर्व आर्थिक और सामाजिक विकास से अमरीका घबरा गया है? शायद इस समय दुनिया में चीन ही एकमात्र ऐसा देश है, जो अमरीका की सैन्य ताकत को आंखें दिखाता है। पिछले दिनों दक्षिण चीन सागर में एक अमरीकी पोत घुसा तो चीन ने उसके पीछे युद्धपोत लगा दिया। इतना दुस्साहस तो इस एकध्रुवीय विश्व में रूस भी नहीं दिखा पाता।

दुनिया की एकमात्र सुपर पॉवर है अमरीका

1991 में सोवियत रूस के विघटन के बाद से ही अमरीका दुनिया की एकमात्र महाशक्ति बना हुआ है। पिछले करीब 30 साल से उसे चुनौती देने का साहस किसी ने नहीं किया। लेकिन चीन से अब अमरीका खतरा महसूस करने लगा है। बात यहां तक बढ़ गई कि एक पूर्व अमरीकी राजनीतिज्ञ रोन पॉल को डोनाल्ड ट्रंप की आईएनएफ संधि से बाहर होने की धमकी पर सफाई तक देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि 1987 की इस संधि से अमरीका के अलग होने की संभावना का यह अर्थ न निकाला जाए कि अपनी सुरक्षा के लिए अमरीका परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने जा रहा है।

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दुनिया के अस्तित्व के लिए बेहद खतरनाक

दरअसल ट्रंप ने उस ऐतिहासिक संधि को खत्म करने की धमकी दी थी, जो तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन और मिखाइल गोर्बाचेव के बीच की गई थी। इस संधि को खत्म करने का कारण रूस के इस संधि का पालन न करने को बताया जा रहा है। लेकिन यह माना जा रहा कि अमरीकी प्रशासन अब चीन के बढ़ते सैन्यीकरण को आधार बनाकर अमरीका के परमाणु हथियारों की संख्या को बढ़ाने को उचित बताने की कोशिश करेगा। ये हालात दुनिया के अस्तित्व के लिए एक बेहद बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।