
Ajmer Bandh: ऐतिहासिक आनासागर झील की बदहाली, बढ़ती गंदगी, बदबू और बड़ी संख्या में मछलियों की मौत के विरोध में गुरुवार को शहर कांग्रेस के आह्वान पर 'अजमेर बंद' का व्यापक असर देखने को मिला। बंद को देखते हुए शहर के कई निजी स्कूलों और कॉलेजों ने एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी। वहीं, बाजारों में सामान्य जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ।
बता दें कि गुरुवार सुबह से ही बंद का असर अजमेर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में नजर आने लगा। शहर के ऐतिहासिक दरगाह बाजार में सुबह से ही कई होटल और अधिकांश दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। हालांकि, अकीदतमंदों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दरगाह के आसपास की फूलों की दुकानें खुली नजर आईं। कंट्रोल रूम और विशेष टीमों के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह से ही शहर के अलग-अलग चौराहों और बाजारों में व्यापारियों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील करते देखे गए।
बंद का आह्वान कराने निकले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रामक रुख भी शहर के कई हिस्सों में देखने को मिला। रेलवे स्टेशन के बाहर सवारी ले जा रहे ई-रिक्शा और टेम्पो को कांग्रेसियों ने जबरन रुकवाया। कई वाहनों में बैठे पर्यटकों और यात्रियों को नीचे उतार दिया गया। इस दौरान एक ई-रिक्शा चालक मौका देखकर अपना वाहन लेकर वहां से भाग निकला।
कचहरी रोड पर स्थित कई प्राइवेट बैंकों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और जबरन बैंक बंद करवा दिए। शटर गिराने के बाद अंदर काम कर रहे बैंक कर्मचारियों को बाहर निकाला गया और शांतिपूर्वक सहयोग की अपील की गई। कचहरी रोड स्थित एक बंद पेट्रोल पंप के बाहर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एक विशाल रैली निकाली और पूरे शहर में भ्रमण कर बंद को सफल बनाने का आह्वान किया। डॉ. जयपाल ने स्पष्ट किया कि आमजन की सहूलियत को देखते हुए अस्पताल, मेडिकल स्टोर, एम्बुलेंस और अग्निशमन जैसी आपातकालीन व आवश्यक सेवाओं को इस बंद से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके अलावा बंद के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए जिला कांग्रेस कार्यालय में एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अजमेर जिला पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आई। अजमेर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशों पर शहर को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया। शहर के प्रमुख चौराहों, रेलवे स्टेशन, कचहरी रोड और संवेदनशील इलाकों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार गश्त कर स्थिति की निगरानी और मॉनिटरिंग करते रहे, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
आनासागर झील को बचाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने 23 करोड़ का एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि झील में गिरने वाले 13 प्रमुख नालों के पानी को आपस में कनेक्ट कर इंटरसेप्ट किया जाएगा और उसे फिल्टर करने के बाद ही झील में छोड़ा जाएगा। निगम का दावा है कि घरों में सीवरेज कनेक्शन होने की वजह से बाकी अन्य नाले सूख चुके हैं।
हालांकि, स्थानीय निवासियों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि निगम के ये दावे हकीकत से एकदम अलग हैं। धरातल पर आज भी सीवरेज का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे ऐतिहासिक आनासागर झील में गिर रहा है। इसी जहरीले पानी और गाद के कारण झील में ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है, जिससे लगातार मछलियां मर रही हैं और पूरे इलाके में भयानक दुर्गंध फैली हुई है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक प्रशासन आनासागर झील को साफ करने और इसमें गिर रहे गंदे नालों को रोकने के ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक जनता के हक और शहर की धरोहर को बचाने का यह आंदोलन जारी रहेगा।