मकर संक्रांति पर बेंगलूरु के सॉफ्टवेयर इंजीनियर दंपती को जीवन का अनमोल उपहार मिला। पांच साल से प्रतीक्षा कर रहे दंपती ने अजमेर के बालिका शिशु गृह से ढाई वर्षीय बालिका को गोद लिया। कलक्टर की सहमति से बच्ची सौंपी गई।
अजमेर: मकर संक्रांति दान-पुण्य का पर्व माना जाता है। लेकिन इस बार यह पर्व बेंगलूरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर दंपती के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार लेकर आया। पांच साल से आंगन में बिटिया की किलकारी सुनने की ख्वाहिश रखने वाले दंपती को मकर संक्रांति के अवसर पर अजमेर के बालिका शिशु गृह से एक नन्ही बालिका को गोद लेने का सौभाग्य मिला।
पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि दंपती ने पांच साल पहले 2021 में केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (कारा) में आवेदन किया था। बेंगलूरु की एजेंसी ने उनकी गृह अध्ययन रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट के आधार पर उम्मीद जगी। 2024 में उन्होंने फिर से आवेदन किया और अंततः अजमेर जिले के बालिका शिशु गृह में पल रही करीब ढाई वर्षीय बालिका को गोद देने की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
अजमेर बालिका गृह में दत्तक ग्रहण को लेकर आवश्यक बैठक हुई। दंपती से बातचीत और औपचारिकताओं के बाद जिला कलक्टर लोकबंधु की सहमति से मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर बालिका को दंपती के सुपुर्द कर दिया गया।
दंपती के साहसिक कदम से न केवल मासूम बालिका को परिवार मिला, बल्कि दंपती के 12 वर्षीय बेटे की भी बरसों की इच्छा पूरी हुई। माता-पिता के अनुसार, बेटा लंबे समय से घर में बहन के आने का इंतजार कर रहा था और अब उसे लेकर बेहद उत्साहित है।
यह बच्ची जुलाई 2025 में पालने में छोड़ी गई थी, आज उसे घर मिल गया। मकर संक्रांति पर पुण्य करने की परंपरा को जीवित रखते हुए दंपती ने न केवल बालिका को अपनाया। बल्कि उसे खुशहाल और सुरक्षित भविष्य भी दिया।
-अंजली शर्मा, अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी