
Agniveer Samudra Singh Gurjar: राजस्थान में अलवर जिले के केसरपुर निवासी अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर (20) के शव की पहचान के बाद 2 नवंबर को डिब्रूगढ़ में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली (अनिनी) स्थित पशुपानी इलाके में 14 अगस्त को बादल फटने से आई बाढ़ में समुद्र समेत सेना के सात जवान बह गए थे। करीब 80 दिन बाद समुद्र का शव मिला था।
अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर की डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि होने के बाद शव का अंतिम संस्कार कर अस्थियां परिजनों को सौंप दी गईं। बुधवार रात तक अस्थियां अलवर पहुंचेंगी। इन्हें ईटाराणा सैन्य छावनी में रखा जाएगा। 5 नवंबर को सैन्य सम्मान के साथ अस्थियां उनके घर ले जाई जाएंगी।
बाढ़ में बहे सात जवानों में से दो को सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित बचा लिया था। समुद्र समेत पांच जवानों का कोई सुराग नहीं मिला था। घटना के बाद से सेना और आईटीबीपी ने संयुक्त रूप से सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाया।
समुद्र दो बहनों का इकलौता भाई था। उनका चचेरा भाई प्रहलाद गुर्जर प्रयागराज में सेना में कार्यरत हैं। घटना से ठीक पहले समुद्र ने पिता को फोन कर कहा था कि वह राखी पर घर आएगा, लेकिन घर लौटने से पहले ही हादसे का शिकार हो गया।
पिता के मुताबिक, फोन पर समुद्र सिंह गुर्जर ने बताया था कि उसने छुट्टी के लिए आवेदन किया था और रक्षाबंधन पर घर आने की तैयारी कर रहा था। उसने घर आकर पिता का इलाज करवाने की बात भी कही थी। परिवार के लिए बेटे की यह आखिरी बातचीत अब भावुक कर देने वाली याद बन गई। समुद्र का चयन साल 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में हुआ था।
जबलपुर में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश के दिबांग जिले में हुई थी। समुद्र अविवाहित था और परिवार में इकलौता बेटा था। उसकी दोनों बहनों की शादी हो चुकी है और पिता खेती करते हैं। समुद्र आखिरी बार मई में छुट्टी लेकर घर आया था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद समुद्र के ताऊ के बेटे प्रहलाद भी अरुणाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए थे। प्रहलाद खुद सेना में कार्यरत थे। वहीं, पूरे केसरपुर गांव में समुद्र की सुरक्षित वापसी के लिए लोग प्रार्थना कर रहे थे। परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि रेस्क्यू टीम जल्द समुद्र और अन्य लापता जवानों तक पहुंच जाएगी।
समुद्र सिंह का परिवार सेना से जुड़ा रहा था। उसके दादा पलटूराम सेना में हवलदार थे। समुद्र ने भी दादा से प्रेरणा लेकर सेना में जाने का फैसला किया था। परिवार के कई अन्य सदस्य भी सेना से जुड़े हुए थे। समुद्र के लापता होने के बाद से परिवार गहरे सदमे में था और लगातार उसके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठा था। उस समय सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था। अलवर में परिवार और गांव के लोग समुद्र सिंह समेत सभी लापता जवानों के जल्द सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे थे।