Buddheshwar Story: सडक़ हादसे के बाद चला लंबा इलाज, लेकिन शरीर के एक हिस्से ने काम करना कर दिया है बंद, पैरालाइज्ड हो गया है शरीर, इलाज में बिक गई जमीन और जेवर, अब प्रशासन से उम्मीद
अंबिकापुर. एक युवा की जिंदगी की रफ्तार एक सडक़ हादसे (Road Accident) ने छिन गई। ऐसे में अब हर दिन उसके लिए संघर्षों से भरा है। सरगुजा जिले के धौरपुर तहसील में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर बुधेश्वर प्रसाद सिदार (Buddheshwar Story) पिछले 6 वर्षों से पैरालाइसिस की पीड़ा झेल रहे हैं। हादसे के बाद उनका शरीर का बायां हिस्सा काम करना बंद कर चुका है। वहीं वर्ष 2019 से वेतन बंद होने के कारण अब परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। मंगलवार को वे व्हीलचेयर पर अपनी मां, बहन और जीजा के साथ कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और मदद की गुहार लगाई।
मूलत: सक्ती जिले के डबरा तहसील अंतर्गत ग्राम तुलसीडीह निवासी 35 वर्षीय बुधेश्वर प्रसाद सिदार की नियुक्ति वर्ष 2014 में व्यापम के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator) पद पर हुई थी। वर्ष 2019 में सडक़ हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका लंबा इलाज चला।
हादसे में वे पैरालाइसिस के शिकार हो गए और अब व्हीलचेयर के सहारे जीवन गुजार रहे हैं। बुधेश्वर के सिर पर पत्नी, एक बेटा व विधवा मां की जिम्मेदारी है। वह पूरे परिवार का इकलौता कमाउ सदस्य है। पैरालाइसिस हो जाने के कारण वह काम करने में असमर्थ है।
बुधेश्वर ने बताया कि हादसे के बाद करीब 3 माह तक रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चला। इलाज (Treatment) में 24 लाख रुपए से अधिक खर्च हो गए। इसके लिए परिवार को जमीन बेचनी पड़ी, वहीं मां और पत्नी के जेवर तक गिरवी रखने पड़े। इसके बावजूद हालत में पूरी तरह सुधार नहीं हो सका।
इधर हादसे (Road accident) के बाद से विभाग द्वारा उनका वेतन रोक दिया गया। ‘नो वर्क-नो पेमेंट’ के आधार पर भुगतान बंद होने से परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इलाज और दवाइयों का खर्च भी उठाना भारी पड़ रहा है।
जनदर्शन में पहुंचे बुधेश्वर ने कलेक्टर (Surguja collector) से वेतन बहाल कराने और आर्थिक सहायता देने की मांग की। व्हीलचेयर पर बैठे बुधेश्वर की हालत देखकर जनदर्शन में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। परिवार को अब प्रशासन से राहत और संवेदनशील पहल की उम्मीद है।