
अंबिकापुर। सेंट्रल जेल अंबिकापुर (Central Jail Ambikapur) में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 8 कैदियों को स्वतंत्रता दिवस से पहले रिहा किया गया। जेल में उनके अच्छे व्यवहार व आचरण की वजह से उन्हें रिहाई मिली है। जेल से रिहा होने के बाद सभी आठों कैदियों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने में हमसे अपराध हो गया था। उसका प्रायश्चित हम जेल में रहकर कर रहे थे। अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ बाकी का बचा जीवन अच्छे से व्यतीत करेंगे। जेल से रिहा होने के दौरान जेल अधीक्षक ने उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र के अलावा पारिश्रमिक भी प्रदान किया गया। बता दें कि 14 अगस्त को 8 और कैदियों की रिहाई होनी है।
सेंट्रल जेल अंबिकापुर में वर्तमान में 2 हजार 181 बंदी व कैदी निरुद्ध हैं। इनमें हत्या, रेप, चोरी, लूट, डकैती समेत अन्य अपराधों के बंदी शामिल हैं। जेल में अच्छे आचरण और व्यवहार के कारण समय पूर्व कैदियों की रिहाई (Release from Jail) भी की जाती है। इसी कड़ी में हत्या समेत अन्य अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 8 कैदियों को सेंट्रल जेल से स्वतंत्रता दिवस से पूर्व शासन के नियमों के तहत रिहा किया गया।
इस संबंध में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि जेल में अच्छे आचरण के कारण 8 बंदियों की समय पूर्व रिहाई हो रही है। ये सभी आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उन्होंने बताया कि नियम 358 के तहत एक कार्रवाई होती है, जिसमें जेल अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक व कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद दंडादेश बोर्ड की वीडियो टीम की अनुशंसा के आधार पर कैदियों को समय पूर्व छोड़ा जाता है।
उन्होंने कहा कि रिहा कैदियों को जेल में किए गए कार्यों के आधार पर अनुभव प्रमाण पत्र व पारिश्रमिक भी प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को और 8 कैदियों (Released Prisoners) को छोड़ा जाएगा।
जेल अधीक्षक ने बताया कि यह एक भावुक समय होता है। ये कैदी यदि 14 साल तक घर में रहते तो अच्छे आदमी बन जाते। कैदियों के साथ ही यह जेल के लिए भी भावुक पल है। ये सब जेल की किसी ने किसी शाखा में पदस्थ थे। ये खुद भी काम करते थे और दूसरों से भी करवाते थे। हमें खुशी है कि अच्छे आचरण की वजह से उन्हें रिहा किया जा रहा है, ताकि ये बाकी का जीवन अच्छे से व्यतीत कर सकें।
हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा (Lifetime imprisonment) काट रहे सीतापुर के ग्राम कोटछाल निवासी ओमप्रकाश धनकी ने कहा कि आजादी की पूर्व संध्या पर रिहा हो रहा हूं, काफी खुशु महसूस हो रही है। जाने-अनजाने में आज से 15 साल पूर्व मुझसे गलती हो गई थी। इसका मुझे काफी पछतावा है। मृतक की आत्मा की शांति की कामना करते हुए वह रो पड़ा और कहा कि अब ऐसे गलती कभी नहीं करूं, ऐसा प्रयास रहेगा। अपने परिवार के साथ बाकी का जीवन अच्छे से बिताऊंगा।
वहीं कोटछाल के ही निवासी मुकेश धनकी ने कहा कि हत्या (Murder) के अपराध में मैं 15 साल की सजा काट चुका हूं। बाकी का समय अब घरवालों के साथ रहकर अच्छे से गुजारुंगा। मुझे काफी अच्छा लग रहा है कि शासन की योजना का लाभ मिला। उसने बताया कि वह पूर्व में सरपंच था, इसके बाद अनजाने में हत्या जैसा अपराध हो गया था। अब परिवार के साथ खेती-बाड़ी करूंगा।