Aaj Ka Panchang 2 May 2026 : आज का पंचांग 2 मई 2026 शनिवार: प्रतिपदा तिथि, विशाखा नक्षत्र, व्यतिपात योग, शुभ चौघड़िया समय, राहुकाल, दिशा शूल, चंद्र राशि परिवर्तन, नारद जयंती और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी जानें।
Aaj Ka Panchang 2 May 2026 (Saturday) : आज का पंचांग 2 मई 2026, शनिवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि, विशाखा नक्षत्र और व्यतिपात योग का संयोग बन रहा है, जो विशेष पुण्यदायक माना जाता है। साथ ही त्रिपुष्कर योग और श्री नारद जयंती जैसे विशेष अवसर भी इस दिन को और अधिक शुभ बना रहे हैं।
पंडित मुकेश भारद्वाज के अनुसार यदि आप आज किसी नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या पूजा-पाठ की योजना बना रहे हैं, तो शुभ चौघड़िया, राहुकाल और दिशा शूल की जानकारी अवश्य जान लें। सही समय का चयन आपके कार्यों को सफल और मंगलमय बना सकता है।
| क्रमांक | चौघड़िया प्रकार | समय अवधि | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 1 | शुभ | 7:30 – 9:08 | शुभ कार्य प्रारम्भ के लिए उपयुक्त |
| 2 | चर | 12:24 – 2:02 | सामान्य/गतिशील कार्यों के लिए अच्छा |
| 3 | लाभ | 2:02 – 3:40 | लाभदायक कार्यों के लिए उत्तम |
| 4 | अमृत | 3:40 – 5:18 | अत्यंत शुभ, सभी कार्यों के लिए श्रेष्ठ |
दिशा शूल - आज पूर्व दिशा में दिशा शूल रहेगा । इसलिए आज पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
राहु काल वेला - (मध्यमान से) दिन 9.00 से 10.30 तक
तिथि – प्रतिपदा तिथि रात्रि 12.50 तक होगी तदुपरान्त द्वितीया तिथि होगी ।
नक्षत्र – विशाखा नक्षत्र सम्पूर्ण दिन रात्रि होगा ।
योग – व्यतिपात योग रात्रि 9.45 तक रहेगा तदुपरान्त वरियान योग रहेगा ।
करण – बालव करण दिन 11.51 तक रहेगा तदुपरान्त कौलव करण रहेगा।
विशिष्ट योग – त्रिपुष्कर योग रात्रि 12-50 से
व्रत / दिवस विशेष – श्री नारद जयंती, व्यतिपात पुण्यं, गुरु अर्जुन देव जयंती (न. मत से) ,
चन्द्रमा – आज रात्रि 12.30 तक तुला राशि में होगा तदुपरान्त वृश्चिक राशि में प्रवेश होगा ।
ग्रह का राशि /नक्षत्र परिवर्तन – बुध अस्त पूर्व में रात्रि 12-56 पर,
तुला राशि का स्वामी शुक्र होता हैं। यह सौम्य व भावुक होते हैं। इन्हें देश-विदेश घूमने का शौक होता है, किसी के अधीनस्थ रह कर कार्य करना पसंद करते हैं। यह एक स्थान पर टिक कर नहीं रहते। ये सुंदरता पसंद होते हैं और कलात्मक होते हैं। इनका स्वभाव आकर्षक होता हैं। ये न्यायशील, बुद्धिमान, तर्कशील एवं सर्तक रहने वाला होते हैं।
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता हैं। ऐसे जातक स्थिर प्रवृति के होते हैं। ये जिद्दी, उत्साही, स्पष्टवादी, परिश्रमी, ईमानदार, समझदार, ज्ञानी, साहसी, दृढ़संकल्प, शीघ्र उत्तेजित हो जाने वाले व अपनी मेंहनत से कार्य करने वाले होते हैं। अपना निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। इनको द्वा व्यवसाय, पुलिस, शोधकार्य, साधना, खनिज़ पदार्थों का व्यवसाय, खेती, पुरातत्त्व विज्ञान आदि कार्यों