
Yellow Sapphire Benefits: पुखराज (Yellow Sapphire) को ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का प्रमुख रत्न माना जाता है। मान्यता है कि इसे सही सलाह और कुंडली के अनुसार धारण करने पर करियर, शिक्षा, विवाह और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह स्थिति पर निर्भर माना जाता है। ऐसे में जानते है ज्योतिषी डॉ शरद शर्मा से पुखराज का असर कितने समय में दिख सकता है और इसे पहनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
लोग सोचते हैं कि पुखराज (Yellow Sapphire) पहनते ही चमत्कार हो जाएगा, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। ज्यादातर मामलों में इसकी ताकत आपकी कुंडली और ग्रहों की चाल पर निर्भर करती है।
अगर पुखराज आपकी कुंडली के हिसाब से सही बैठता है तो ये आपके करियर और किस्मत की पूरी तस्वीर बदल सकता है।
धन-करियर में फायदा: बिजनेस की सुस्ती दूर करता है, नौकरी में प्रमोशन के नए मौके मिलते हैं।
शादी में बाधा खत्म: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुखराज को विवाह, शिक्षा और आर्थिक प्रगति से जोड़कर देखा जाता है।
मन साफ, फैसले अच्छे: ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पुखराज पहनने से मानसिक शांति मिलती है और सोच समझने की ताकत देता है कई बार जिंदगी में बस यही चाहिए होता है।
पढ़ाई में सफलता: स्टूडेंट्स की एकाग्रता बढ़ाता है, यानी पढ़ाई में दिल लगेगा।
आजकल बाजार में नकली पुखराज ढूंढना आसान है कांच या सिट्रीन पकड़ा देते हैं और असली के दाम वसूलते हैं। ध्यान रहे, सरकारी लैब से सर्टिफाइड रत्न ही खरीदें, वर्ना फायदा कम, नुकसान ज्यादा हो सकता है।
ऐसी मान्यता है कि रत्नों का रंग और उससे निकलने वाली किरणें हमारे शरीर की एनर्जी को छूती हैं। पुखराज से निकली पीली रोशनी दिमाग को एक्टिव रखती है। लेकिन आधुनिक विज्ञान ने अब तक पुखराज या अन्य रत्नों के ज्योतिषीय प्रभावों की पुष्टि नहीं की है। हालांकि रंगों और मनोविज्ञान पर कुछ अध्ययन उपलब्ध हैं।
जब भी पुखराज पहनें, तो इन गड़बड़ियों से बचें, वरना असर उल्टा हो सकता है—
बिना कुंडली देखे पहनना: हर कोई पुखराज नहीं पहन सकता। खासकर वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के लोग तो बिना किसी एक्सपर्ट ज्योतिष के बताए बिल्कुल न पहनें।
खंडित या नकली रत्न: पुखराज में दरार हो या फिर वह असली ना हो, तो शुभ की जगह नुकसान होना तय है।
गलत धातु या सही ऊंगली भूलना: पुखराज हमेशा इंडेक्स फिंगर में पहनें सोने या पंचधातु में ही। चांदी में भूलकर भी मत पहनिए।
अगर पुखराज पहनने जा रहे हैं तो गुरुवार की सुबह सबसे बढ़िया समय है। आधे घंटे soak करें उसे कच्चे दूध, फिर गंगाजल में। उसके बाद 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करें और मन में गुरू का ध्यान रखते हुए तर्जनी उंगली में पहन लें। याद रखें, पूरी श्रद्धा और सही तरीके से ही रत्न असली असर दिखाता है। बाकी सब नकल है।