
Bhaun Pratap Encounter Case: उत्तर प्रदेश में कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू के एनकाउंटर के बाद एक बार फिर ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश सुर्खियों में हैं। अयोध्या में STF की कार्रवाई में भानु प्रताप के मारे जाने की पुष्टि खुद अमिताभ यश ने की। इससे पहले भी उनकी टीम कई चर्चित अपराधियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे चुकी है। अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे के नेटवर्क पर हुई कार्रवाई में भी उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था।
पुलिस के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे STF को सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश अयोध्या जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद STF की टीम ने इलाके में कार्रवाई शुरू की। बताया गया कि एमी घाट के पास मोटरसाइकिल पर सवार दो बदमाशों का STF टीम से आमना-सामना हो गया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में भानु प्रताप सिंह को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वहीं उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस और STF की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू का नाम उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधियों में गिना जाता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कई संगीन मुकदमे दर्ज थे। हत्या और रंगदारी से जुड़े मामलों में उसका नाम अक्सर सामने आता रहा था। इसी वजह से वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था।
भानु प्रताप एनकाउंटर के बाद जिस अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह हैं उत्तर प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश। अमिताभ यश 1996 बैच के IPS अधिकारी हैं। मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले अमिताभ यश को उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे चर्चित अधिकारियों में गिना जाता है। उनके पिता रामयश सिंह भी IPS अधिकारी रहे हैं।
पुलिस के शुरुआती समय में उनकी तैनाती संतकबीरनगर में हुई। इसके बाद उन्होंने बाराबंकी, महाराजगंज, हरदोई, जालौन, सहारनपुर, सीतापुर, बुलंदशहर, नोएडा और कानपुर जैसे जिलों में SP और SSP के रूप में काम किया।
अमिताभ यश को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में भी जाना जाता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके नेतृत्व में 150 से ज्यादा अपराधी मुठभेड़ों में मारे गए हैं। उन्होंने मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद गैंग से जुड़े कई शार्प शूटरों के खिलाफ अभियान चलाया।
इसके अलावा पेपर लीक गिरोह, डार्क वेब के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क और कई संगठित अपराध समूहों के खिलाफ भी उनकी टीम ने कार्रवाई की है।
24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल और उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में अतीक अहमद के बेटे असद अहमद पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
यूपी STF के मुताबिक, झांसी में हुई मुठभेड़ के दौरान असद और उसके साथी गुलाम ने पुलिस पर फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई में दोनों मारे गए। इस ऑपरेशन की निगरानी STF के ADG अमिताभ यश कर रहे थे। असद और अब भानु प्रताप एनकाउंटर के बाद अमिताभ यश एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
साल 2007 में STF में रहते हुए अमिताभ यश ने बुंदेलखंड के कुख्यात डकैत ददुआ के खिलाफ अभियान चलाया था। बाद में उनकी टीम ने डकैत ठोकिया के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की। चित्रकूट के जंगलों को डकैतों के आतंक से मुक्त कराने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे और उसके नेटवर्क के खिलाफ हुई कार्रवाई में भी उनकी टीम की अहम भूमिका रही थी।