
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में अब ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कथित इस्तीफे की सच्चाई को लेकर भी सरकार और ट्रस्ट को घेरा है।
राम मंदिर के चढ़ावे में हुई हेराफेरी पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर मोहन भागवत को एक स्पष्ट बयान देना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, "जब मोहन भागवत हर विषय और खासकर मुसलमानों के बारे में बयान देते हैं, तो उन्हें इस मामले पर भी अपनी बात रखनी चाहिए।" साजिद रशीदी ने कहा कि यह कोई छोटा मामला नहीं है बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था को ठगा गया है। उन्होंने साफ कहा कि मैं इसे सिर्फ पैसे की चोरी नहीं मानता बल्कि यह सीधे तौर पर आस्था की चोरी है और इस पर संघ प्रमुख को जवाब देना चाहिए।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबरों पर भी मौलाना साजिद रशीदी ने सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि इस्तीफा आखिर है कहां? उन्होंने कहा कि आज तक वह इस्तीफा पब्लिक डोमेन में यानी जनता के सामने नहीं आया है। जब इस्तीफा पब्लिक डोमेन में है ही नहीं तो उसे वापस लेने या संतों द्वारा नामंजूर करने की बात कहां से आ गई। साजिद रशीदी ने मांग की कि पहले सरकार या चंपत राय उनका इस्तीफा जनता को दिखाएं और फिर उस पर कोई चर्चा करें।
राम मंदिर चंदा-चोरी से जुड़े विवाद पर जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से सवाल किया तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले शब्दों में अपनी बात रखी। मोहन भागवत ने कहा कि इस पूरे मामले पर बीते कल ही संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया जा चुका है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आप सभी उस बयान को देख सकते हैं उसमें संघ का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है।
गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में करोड़ों रुपए की कथित हेराफेरी के आरोप लगने के बाद से ही विपक्षी दल और कई संगठन लगातार RSS और BJP पर निशाना साध रहे हैं। अब ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष ने भी इस मामले में मोहन भागवत की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए हैं। ऐसे में मोहन भागवत का बयान काफी अहम माना जा रहा है। आखिर क्यों उन्होंने इस विषय पर अलग से कोई टिप्पणी करने के बजाय संगठन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान का हवाला देना ही मुनासिब समझा?