
VHP की बैठक आयोध्या की जगह दिल्ली शिफ्ट (फोटो- पत्रिका)
Ram Mandir Donation Scam Case Update: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद का असर अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) संगठन पर भी दिखने लगा है। SIT जांच और पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी के बीच VHP ने अपनी केंद्रीय प्रबंध समिति की महत्वपूर्ण बैठक का स्थान बदल दिया है। यह बैठक अब अयोध्या के बजाय देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित की जाएगी। चंदा चोरी मामले में मचे बवाल के बीच इसे VHP का डैमेज कंट्रोल कदम माना जा रहा है।
VHP ने ना सिर्फ अपनी बैठक की जगह बदली है बल्कि इसमें शामिल होने वाले पदाधिकारियों की संख्या में भी बड़ी कटौती की है। पहले यह पांच दिवसीय बैठक 25 से 29 जून तक अयोध्या में होनी थी, लेकिन अब यह बैठक 18 और 19 जुलाई को दिल्ली में होगी। पहले इस बैठक में करीब 350 लोगों के जुटने की उम्मीद थी और अब केवल 150 लोग ही शामिल होंगे। हर राज्य से चार के बजाय अब केवल दो पदाधिकारियों को ही दिल्ली बुलाया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े और VHP के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय की भूमिका को लेकर संगठन के अंदर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है जिसके बाद इस बैठक में उनकी नई भूमिका को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा VHP की नजर ट्रस्ट की इमरजेंसी मीटिंग पर भी टिकी है। ट्रस्ट चंपत राय और डॉक्टर अनिल मिश्रा को लेकर जो निर्णय लेगा उसी आधार पर VHP भी आगे का फैसला करेगी। माना जा रहा है कि अपनी छवि सुधारने के लिए VHP चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की संगठन से छुट्टी भी कर सकती है।
चंदा चोरी के आरोपों में घिरे VHP पदाधिकारियों को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। इसका नमूना 2 जुलाई को तब देखने को मिला जब VHP के केंद्रीय सह-मंत्री गोपाल राव लखनऊ से बेंगलुरु की इंडिगो फ्लाइट में सफर कर रहे थे। फ्लाइट में किसी यात्री ने उन्हें पहचान लिया और चंदा चोर को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई। देखते ही देखते यात्रियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी जिससे गोपाल राव काफी असहज हो गए और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर तेजी से बाहर निकल गए।
सूत्रों के अनुसार गोपाल राव के खिलाफ जनता का गुस्सा सामने आने के बाद ही आरएसएस की ओर से इस मामले में बयान जारी किया गया था। संघ और बीजेपी को अब इस घटना से जनता की नाराजगी का अहसास हो गया है। दोनों संगठन अब बचाव की मुद्रा में आ गए हैं और डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। अगर चंदा चोरी को लेकर जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो पार्टी को इसका भारी सियासी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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Updated on:
04 Jul 2026 01:50 pm
Published on:
04 Jul 2026 01:49 pm
