
Shri Ram Temple Trust May Dissolved Ayodhya: राम मंदिर के चढ़ावे में कथित करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि चढ़ावे की चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर एक संगठित समूह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे रहा था। अब तक की जांच में कई कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है, जबकि ट्रस्ट के प्रशासनिक स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका सबसे अहम कड़ियों में मानी जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वह बिना किसी आधिकारिक पद के भी मंदिर प्रशासन के विभिन्न कार्यों में किस आधार पर हस्तक्षेप करता था। सूत्रों का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था में भी उसके प्रभाव के कारण उसके आवागमन पर किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं होती थी। हालांकि इन सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस जांच में गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव सहित कई कर्मचारियों के खिलाफ संदेह गहराया है। आरोप है कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में शामिल कुछ कर्मचारियों ने मिलकर कथित रूप से रकम निकालने का नेटवर्क तैयार किया। वहीं यह भी जांच का विषय है कि ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों को इस गतिविधि की जानकारी थी या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। जांच एजेंसियां दोनों संभावनाओं पर समान रूप से काम कर रही हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार अथवा जांच के दायरे में आए आरोपियों के पास से अब तक कुल 79,85,493 रुपयेबरामद किए जा चुके हैं। सबसे अधिक 20.40 लाख रुपये अविनाश शुक्ला के पास से मिले हैं। इसके अलावा लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख, करुणेश पांडेय से 18.07 लाख, अनुकल्प मिश्रा से 16.32 लाख,रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से 10 लाख, रामशंकर मिश्रा से 7.32 लाख तथा मनीष यादव से 2 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है। कुछ आरोपियों के यहां से विदेशी मुद्रा के रूप में लगभग 900 से 1000 अमेरिकी डॉलर भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर बरामदगी का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, छह जून को मामला सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट ने अपने स्तर पर संबंधित कर्मचारियों से धनराशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। कई कर्मचारियों से कथित रूप से रकम वापस ली गई और उनसे लिखित बयान भी लिए गए। बाद में पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में इस आंतरिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ट्रस्ट को कब और किस स्तर पर इस कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली थी।
मामले में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी प्रशासनिक स्तर तक पहुंची थी या नहीं। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस सभी दस्तावेजों, सीसीटीवी रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही है।
चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों की चर्चाओं ने इस संभावना को और बल दिया है। यदि दोनों पद रिक्त होते हैं तो पहले से खाली एक ट्रस्टी पद को मिलाकर 3 महत्वपूर्ण स्थान खाली हो जाएंगे, जिसके बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना भी जताई जा रही है।
फरवरी 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। पिछले कुछ वर्षों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या, प्रतिदिन मिलने वाला चढ़ावा, निर्माण कार्य, सुरक्षा व्यवस्था, खरीद, लेखा और मानव संसाधन से जुड़े कार्यों का दायरा काफी बढ़ चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल पुलिस की जांच कई स्तरों पर जारी है। अधिकारी संबंधित कर्मचारियों, वित्तीय लेनदेन, सीसीटीवी फुटेज और प्रशासनिक निर्णयों की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित चढ़ावा हेराफेरी में किसकी क्या भूमिका रही और प्रशासनिक स्तर पर चूक हुई या सुनियोजित मिलीभगत थी।