
अयोध्या राम मंदिर (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Ayodhya Ram Temple Donation Controversy Update:राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी और गबन के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इस बीच प्रतापगढ़ के समाजसेवी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1 करोड़ रुपये का दान देने वाले सियाराम उमरवैश्य ने इस पूरे प्रकरण पर गहरा दुख जताया है। उनका कहना है कि भगवान के नाम पर श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए धन का गलत इस्तेमाल करने वालों को कभी माफी नहीं मिलेगी और ऐसे लोगों को अपने कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ेगा।
सियाराम उमरवैश्य ने बताया कि वह अब 75 वर्ष के हो चुके हैं। जब अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने की शुरुआत हुई तो उन्होंने भी अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान देने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन बेचकर एक करोड़ रुपये मंदिर निर्माण के लिए दान किए।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में केवल एक ही भावना थी कि यह धन भगवान राम के कार्य और मंदिर की सेवा में लगेगा। लेकिन अब जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, उससे उन्हें बेहद पीड़ा हुई है।
सियाराम उमरवैश्य ने कहा कि सबसे अधिक दुख इस बात का है कि जिन लोगों पर श्रद्धालुओं ने भरोसा किया, उन्हीं पर चढ़ावे में अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने वास्तव में ऐसा किया है तो यह केवल कानून ही नहीं बल्कि आस्था के साथ भी विश्वासघात है।
उन्होंने कहा कि भगवान के नाम पर आए धन का दुरुपयोग करना सबसे बड़ा पाप है और ऐसे लोगों को ईश्वर कभी क्षमा नहीं करेंगे।
समाजसेवी ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, भगवान के दरबार में हर कर्म का हिसाब होता है। अगर किसी ने श्रद्धालुओं के विश्वास को तोड़ा है तो एक दिन उसका सच सबके सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन भगवान का न्याय भी निश्चित है। दोषी चाहे कोई भी हो, वह अपने किए से बच नहीं पाएगा।
सियाराम उमरवैश्य ने कहा कि इस पूरे विवाद से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों ने वर्षों तक मंदिर निर्माण का सपना देखा, अपनी क्षमता के अनुसार दान दिया और पूरे विश्वास के साथ सहयोग किया। ऐसे में यदि चढ़ावे को लेकर विवाद सामने आता है तो इससे आम श्रद्धालु स्वाभाविक रूप से दुखी होता है।
उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि इस विवाद का एक दूसरा पहलू भी है। इस तरह के आरोपों के कारण भगवान राम और मंदिर को लेकर अनावश्यक चर्चाएं हो रही हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सनातन धर्म में आस्था न रखने वाले लोग भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को मानसिक पीड़ा हो रही है।
उन्होंने कहा कि भगवान का इसमें कोई दोष नहीं है। यदि इंसान बेईमानी करता है तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है, भगवान की नहीं।
सियाराम उमरवैश्य ने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रहेगा, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर भी रोक लगेगी।
उन्होंने कहा कि समाज की नजरों में सम्मान कमाना कठिन होता है, लेकिन गलत कार्यों से वह पलभर में समाप्त हो जाता है। इसलिए जो भी लोग इस मामले में दोषी होंगे, उन्हें कानून और समाज दोनों के सामने जवाब देना होगा।
Updated on:
26 Jun 2026 03:25 pm
Published on:
26 Jun 2026 03:04 pm
बड़ी खबरें
View Allअयोध्या
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
