
Ayodhya Ram Mandir Case: अयोध्या राम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे में कथित गबन का मामला गहराता जा रहा है। मामले की जांच के लिए बनाई गई SIT लगातार दूसरे दिन भी मंदिर पहुंची और करीब 7 घंटे तक जांच-पड़ताल की। जांच में अब तक ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों, पुजारियों और बैंक अधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इस बीच, आचार्य विनोद मिश्र के एक चौंकाने वाले बयान ने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।
आचार्य विनोद मिश्र का दावा है कि उनके एक शिष्य ने जो जौनपुर के बड़े व्यापारी हैं, राम मंदिर बनने के बाद रामलला के लिए करोड़ों रुपये का एक हार और चरण पादुकाएं भेंट की थी। आचार्य का आरोप है कि यह कीमती सामान मंदिर के ही 'टिन्नू' नाम के एक आदमी ने बकायदा रसीद देकर लिया था, लेकिन इसे आज तक भगवान रामलला को नहीं चढ़ाया गया। जब आचार्य ने इस बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि चढ़ावे में मिलने वाले जेवर को बेंगलुरु भेजकर गला दिया जाता है और उसकी ईंट बनाकर रख ली जाती है। हालांकि, इस दावे में कितनी सच्चाई है, इसकी अभी जांच की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के बड़े अधिकारी खुद अयोध्या पहुंचे हैं। टीम ने राम मंदिर ट्रस्ट के दफ्तर जाकर पूरी जांच की। इस दौरान जांच टीम ने ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से पूछताछ की और यह समझने की कोशिश की कि मंदिर में दान कैसे लिया जाता है और उसकी गिनती कैसे होती है। जांच को सही तरीके से करने के लिए पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। वहीं, जिन लोगों पर शक है, उन्हें ट्रस्ट के दफ्तर के बेसमेंट में रखकर पूछताछ की जा रही है और उनसे बरामद पैसों का हिसाब मांगा जा रहा है।
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ट्रस्ट के पूर्व अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पिछले 8 महीनों के सीसीटीवी फुटेज सिस्टम से डिलीट कर दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम सबूत CCTV फुटेज ही माना जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर के खजाने पर विवाद हुआ है। इस ताजा विवाद ने दो साल पुराने एक और दबे हुए मामले को हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार, सावन के प्रसिद्ध झूला मेले के दौरान भगवान राम और उनके तीनों भाइयों (लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न) को पहनाए जाने वाले पारंपरिक सोने के मुकुट अचानक गायब हो गए थे। जब त्योहार की तैयारी के समय पुजारियों ने वो मुकुट ढूंढे, तो वे नहीं मिले। कई महीनों की खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला था।