
Ram Mandir Trust Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और पैसों की गड़बड़ी को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आया है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जिस सोमेश आनंद की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, वह पहली बार खुद मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने अपने गायब होने की सभी खबरों को गलत बताया है। सोमेश ने साफ कहा कि वह कहीं भागे नहीं हैं, बल्कि हर दिन की तरह राम मंदिर परिसर में ही मौजूद हैं और अपना काम कर रहे हैं। सोमेश आनंद ने जांच प्रक्रिया पर भी एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कर रही SIT ने अब तक उनसे एक बार भी पूछताछ नहीं की है।
अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफाई देते हुए सोमेश आनंद ने कहा कि सोशल मीडिया पर मेरे बारे में कई तरह की झूठी बातें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं कहीं गायब नहीं हुआ हूं। मैं रोज राम मंदिर आ रहा हूं और अपनी ड्यूटी कर रहा हूं। उन्होंने आगे कहा कि बेवजह उनका नाम इस पूरे विवाद में घसीटा जा रहा है, जबकि सच्चाई से इसका कोई वास्ता नहीं है।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी पहचान और पृष्ठभूमि को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर उन्हें सोमेश आनंद कहा जा रहा है, लेकिन उनका वास्तविक नाम सोम शंकर अलंद है और वह मूल रूप से कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के रहने वाले हैं। राम मंदिर ट्रस्ट से अपने जुड़ाव और जिम्मेदारी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह पहले विश्व हिंदू परिषद में जिला संगठन मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वह राम मंदिर से जुड़े कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं और इस कार्य के लिए उन्हें ट्रस्ट की ओर से हर महीने 21 हजार रुपये का मानदेय मिलता है।
इस विवाद में संघ और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव का नाम आने पर भी सोमेश आनंद ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने गोपाल राव का बचाव करते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत मेरा और गोपाल जी का नाम इस विवाद में घसीट रहे हैं। असल में उन लोगों का मकसद गोपाल जी की छवि को खराब करना है और इसके लिए वे मेरे नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सोमेश आनंद के इस बयान के बाद अब इस पूरे मामले में नई बहस छिड़ गई है। अब तक चर्चा थी कि सोमेश आनंद के कर्नाटक से अयोध्या के चक्कर काटने और पैसों के लेन-देन को लेकर जांच हो सकती है, लेकिन अब सोमेश का कहना है कि SIT ने उनसे संपर्क तक नहीं किया है। इस दावे ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, सभी को इस मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।