
पूर्व IPS राजेश पांडेय कौन हैं? फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Former IPS Rajesh Kumar Pandey:अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू का अंतिम चरण शुरू हो चुका है। मंगलवार को 9 आवेदकों ने इंटरव्यू दिया। इनमें अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी और मंडलायुक्त रहे पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र के अलावा पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार पांडेय भी शामिल रहे। राजेश पांडेय का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने अपने लंबे करियर में संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ कई महत्वपूर्ण अभियानों में भूमिका निभाई।
गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई से लेकर यूपी STF और ATS से जुड़े अभियानों तक राजेश पांडेय का पुलिस करियर काफी चर्चित रहा है। उनके बारे में बताया जाता है कि वह करीब 70 एनकाउंटर्स में शामिल रहे। अब राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू देने के बाद एक बार फिर उनका नाम चर्चा में है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO पद के लिए अंतिम चरण के इंटरव्यू शुरू हो चुके हैं। मंगलवार को कुल 9 आवेदकों ने इंटरव्यू दिया। इनमें पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र और पूर्व IPS राजेश कुमार पांडेय भी शामिल थे। इस पद के लिए कुल 18 आवेदक अंतिम चरण के इंटरव्यू में हिस्सा ले रहे हैं। राजेश पांडेय का नाम सामने आने के बाद उनके लंबे पुलिस करियर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
राजेश कुमार पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनका मूल संबंध प्रयागराज जिले से है, जिसे पहले इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था। उन्होंने 1982 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बॉटनी में M.Sc. की पढ़ाई पूरी की। उनके परिवार की पृष्ठभूमि पुलिस या प्रशासनिक सेवा से नहीं थी। एक निजी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनका परिवार किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा था और वह परिवार के पहले पुलिस अधिकारी बने। उनके पिता चंद्र प्रकाश पांडेय हाईकोर्ट में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत थे।
राजेश पांडेय का शुरुआती करियर सीधे पुलिस सेवा की ओर नहीं गया था। उन्होंने विज्ञान विषय से पढ़ाई की और 1982 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बॉटनी में M.Sc. पूरी की। इसके बाद उन्होंने 1984 में UGC-NET/JRF परीक्षा पास की और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी IARI, पूसा में रिसर्च से जुड़े। हालांकि, बाद में उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।
राजेश पांडेय ने 1986 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC)की परीक्षा पास की और डिप्टी SP बने। पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी शुरुआती पोस्टिंग सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़ और लखनऊ में CO के तौर पर हुई। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मामलों में काम करने का अनुभव मिला। आगे चलकर गंभीर अपराधों और संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनकी पहचान बनी।
राजेश कुमार पांडेय के पुलिस करियर का अहम हिस्सा उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF से जुड़ा रहा। वह यूपी STF और एंटी टेररिज्म स्क्वाड यानी ATS के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। STF का गठन प्रदेश में बड़े अपराधी गिरोहों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने के उद्देश्य से किया गया था। राजेश पांडेय ने STF और ATS में रहते हुए कई महत्वपूर्ण अभियानों में भूमिका निभाई। इन अभियानों में अपराधियों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ों के अलावा आतंकवादी घटनाओं की जांच भी शामिल रही।
राजेश पांडेय के पुलिस करियर की सबसे ज्यादा चर्चा गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई को लेकर होती है। 1990 के दशक में श्रीप्रकाश शुक्ला उत्तर प्रदेश के चर्चित अपराधियों में गिना जाता था। उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले थे। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई गई STF की शुरुआती टीम में राजेश पांडेय भी शामिल थे। STF की टीम ने पहले उसके सहयोगी आनंद पांडेय को दिल्ली में मार गिराया और बाद में गाजियाबाद सीमा के पास हुई मुठभेड़ में श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर किया।
यही कार्रवाई राजेश पांडेय के पुलिस करियर की चर्चित कार्रवाइयों में शामिल रही। उनके बारे में बताया जाता है कि वह करीब 70 एनकाउंटर्स में शामिल रहे।
डिप्टी SP के तौर पर राजेश पांडेय ने सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़ और लखनऊ में काम किया। बाद में लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ में SP सिटी जैसे पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली। IPS में शामिल होने के बाद उन्होंने रायबरेली और गोंडा में SP तथा सहारनपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में SSP के तौर पर काम किया। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश में डीआईजी सिक्योरिटी (DIG Security) के पद पर भी रहे।
लखनऊ से उनका पुराना जुड़ाव रहा। यहां उन्होंने CO महानगर, CO हजरतगंज, CO कैसरबाग, एडिशनल SP ईस्ट और एडिशनल SP क्राइम जैसे पदों पर भी काम किया। राजेश पांडेय ने अपने करियर की शुरुआत PPS यानी प्रांतीय पुलिस सेवा से की थी। 2005 में उन्हें IPS कैडर में प्रमोट किया गया, जिसके बाद उन्होंने SP और SSP स्तर की कई जिम्मेदारियां संभालीं।
राजेश पांडेय का करियर केवल एनकाउंटर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई बड़े आतंकी मामलों की जांच में भी भूमिका निभाई। इनमें 2005 का अयोध्या हमला, 2006 में वाराणसी के दशाश्वमेध मंदिर से जुड़ी आतंकी घटना और फैजाबाद व लखनऊ की जिला अदालतों में हुए ब्लास्ट जैसी घटनाएं शामिल हैं। उन्होंने 2010 में लंदन के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (RIPA) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था।
लंबे पुलिस करियर के दौरान राजेश पांडेय को कई पुरस्कार भी मिले। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें राष्ट्रपति की ओर से 1999, 2000, 2007 और 2016 में 4 बार इंडियन पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री मिला। इसके अलावा उन्हें 2005 में पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से भी सम्मानित किया गया।
पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद भी राजेश पांडेय सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें UPEIDA और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नोएडा सिक्योरिटी ऑफिसर की जिम्मेदारी दी थी। यह जिम्मेदारी एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी थी। उन्होंने अपने पुलिस अनुभवों पर आधारित ‘ऑपरेशन बाजुका’ (Operation Bazooka) नाम की किताब पर भी काम किया है।
अब राजेश पांडेय एक अलग तरह की जिम्मेदारी के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू दिया है। CEO की जिम्मेदारी राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज, व्यवस्थाओं और विभिन्न स्तरों पर समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। इस पद के लिए पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्र और पूर्व IPS राजेश कुमार पांडेय समेत नौ आवेदकों ने मंगलवार को इंटरव्यू दिया। कुल 18 आवेदक अंतिम चरण में शामिल हो रहे हैं।
Updated on:
12 Aug 2026 02:56 pm
Published on:
12 Aug 2026 02:56 pm
