Illegal Extortion From Overloaded Trucks Exposed: समाजवादी पार्टी के बड़े नेता पर केस दर्ज किया गया है। ओवरलोड ट्रकों से अवैध वसूली के सिंडिकेट का खुलासा किया गया है। जानिए पूरा मामला।
Illegal Extortion From Overloaded Trucks Exposed: उत्तर प्रदेशके बलिया जिले में ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही के नाम पर चल रहे एक बड़े अवैध वसूली नेटवर्क का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। लखनऊ STF की कार्रवाई के बाद इस मामले में 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
STF की जांच के आधार पर फूलपुर थाने में समाजवादी पार्टी के नेता सतीश चौधरी नागा, उनके करीबी आकाश चौधरी, सौरभ चौधरी, दिनेश यादव समेत कुल 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि ये लोग ओवरलोड ट्रकों को विभिन्न जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरवाने के लिए संगठित तरीके से अवैध वसूली कर रहे थे।
जांच में सामने आया है कि सिंडिकेट से जुड़े लोग परिवहन विभाग के अधिकारियों की लोकेशन और चेकिंग से जुड़ी सूचनाएं ट्रक संचालकों तक पहुंचाते थे। इससे ओवरलोड वाहनों को कार्रवाई से बचने में मदद मिलती थी और अवैध वसूली का पूरा नेटवर्क सुचारू रूप से चलता था।
STF की जांच में RTO विभाग से जुड़े पुलिसकर्मी योगेश सिंह की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि वह सिंडिकेट को अधिकारियों की गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी देता था। मामला सामने आने के बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उसे निलंबित भी कर दिया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार ओवरलोड ट्रकों से प्रति वाहन करीब 3 हजार रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। इस तरह लंबे समय से यह नेटवर्क पूर्वांचल के कई जिलों में सक्रिय था और करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन की आशंका जताई जा रही है।
एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए बलिया से तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।
मामले में सपा नेता सतीश चौधरी नागा का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। सतीश चौधरी नागा को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव का करीबी माना जाता है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
सिंडिकेट के खुलासे के बाद बिहार सीमा समेत जिले के विभिन्न बॉर्डर क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आरटीओ, खनन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से सघन चेकिंग अभियान चला रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि केवल वसूली करने वालों ही नहीं, बल्कि विभागीय गतिविधियों की जानकारी लीक करने वाले लोगों की भी पहचान की जा रही है। ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।