
Balod farmer innovation: खेती-किसानी में समय, श्रम और लागत कम करने के लिए किसान लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। इसी कड़ी में बालोद जिले के ग्राम अरकार के प्रगतिशील किसान तुलसीराम साहू और उनके बेटे टिकेंद्र साहू ने कृषि क्षेत्र में एक ऐसा देसी कृषि यंत्र तैयार किया है, जो किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इस यंत्र की मदद से खेत में खाद और कीटनाशक दवा का छिड़काव कम समय में किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके जरिए करीब पांच मिनट में एक एकड़ खेत में खाद और दवा का छिड़काव करने का दावा किया गया है।
किसान तुलसीराम साहू और उनके बेटे टिकेंद्र साहू ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और अपनी जरूरत के आधार पर इस कृषि यंत्र को तैयार किया है। सामान्य तौर पर किसानों को खेत में खाद और कीटनाशक दवा के छिड़काव के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इसमें अधिक समय के साथ अतिरिक्त श्रम भी लगता है।
पिता-पुत्र द्वारा तैयार किए गए इस यंत्र में खाद और कीटनाशक दवा का छिड़काव एक साथ करने की सुविधा रखी गई है। इससे किसानों को बार-बार खेत में अलग-अलग छिड़काव करने की आवश्यकता कम हो सकती है। यंत्र के जरिए खेत में समान रूप से छिड़काव करने का प्रयास किया गया है, जिससे खेती का काम अधिक सुविधाजनक और तेज हो सके।
इस देसी कृषि यंत्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यक्षमता बताई जा रही है। किसान पिता-पुत्र के अनुसार, इससे करीब पांच मिनट में एक एकड़ खेत में खाद और दवा का छिड़काव किया जा सकता है। बड़े क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि छिड़काव के काम में लगने वाला समय और श्रम दोनों कम हो सकते हैं।
खासकर फसल के ऐसे समय में जब कम समय में खेत का उपचार करना जरूरी होता है, उस दौरान यह यंत्र किसानों के काम आ सकता है। कम समय में छिड़काव होने से किसान दूसरे कृषि कार्यों पर भी समय दे सकेंगे।
कृषि कार्यों में मजदूरों की उपलब्धता और बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती रहती है। खेत में खाद और कीटनाशक दवा के छिड़काव के लिए अधिक श्रम की जरूरत पड़ने से किसानों का खर्च भी बढ़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया यह कृषि यंत्र किसानों को कम लागत में काम पूरा करने का विकल्प दे सकता है।
पिता-पुत्र का यह नवाचार इसी सोच के साथ तैयार किया गया है कि खेती के कठिन और समय लेने वाले कामों को आसान बनाया जा सके। यंत्र के इस्तेमाल से किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ कृषि कार्यों की लागत को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
तुलसीराम साहू और टिकेंद्र साहू ने किसी बड़े औद्योगिक स्तर पर नहीं, बल्कि खेती की अपनी जरूरतों और अनुभवों के आधार पर इस यंत्र को तैयार किया है। खेती में लंबे समय से काम करने वाले किसानों को खेत की वास्तविक जरूरतों की जानकारी होती है। इसी अनुभव को प्रयोग में लाते हुए पिता-पुत्र ने ऐसा उपकरण बनाने की पहल की, जिसका इस्तेमाल खेत में सीधे किया जा सके।
इस तरह के स्थानीय नवाचार यह भी बताते हैं कि किसान केवल पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले ही नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीक और प्रयोग अपनाने वाले नवप्रवर्तक भी हैं।
पिता-पुत्र द्वारा तैयार किए गए इस कृषि यंत्र की जानकारी मिलने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी इसका निरीक्षण किया। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सोमदास साहू और वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सीएल ठाकुर ने यंत्र को देखा और इसकी उपयोगिता की सराहना की।
अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर किसानों द्वारा तैयार किए गए ऐसे कृषि उपकरण कम लागत में खेती के काम को आसान बनाने में मददगार हो सकते हैं। इस तरह के नवाचारों को प्रोत्साहन मिलने से दूसरे किसान भी अपनी जरूरत के अनुसार नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
आज खेती में तकनीक और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। कम समय में अधिक काम पूरा करना और खेती की लागत को नियंत्रित रखना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में तुलसीराम साहू और टिकेंद्र साहू का यह प्रयास स्थानीय संसाधनों के जरिए खेती को आसान बनाने की दिशा में एक उपयोगी पहल माना जा सकता है।
यदि ऐसे स्थानीय कृषि उपकरणों को तकनीकी रूप से और बेहतर बनाया जाए तथा उनकी उपयोगिता का व्यापक स्तर पर परीक्षण किया जाए, तो भविष्य में इनका इस्तेमाल अन्य किसानों तक भी पहुंचाया जा सकता है। इससे छोटे और मध्यम किसानों को विशेष रूप से लाभ मिल सकता है। फिलहाल ग्राम अरकार के किसान पिता-पुत्र द्वारा तैयार किया गया यह देसी कृषि यंत्र अपने कम समय में छिड़काव की क्षमता के कारण चर्चा में है। खेती में तकनीक के साथ स्थानीय अनुभव और नवाचार को जोड़ने की यह पहल दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।