
शंकरगढ़। विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत बेलसर में बेलसर से बचवार को जोडऩे वाली रपटा पुलिया लगातार हो रही बारिश और पानी के तेज बहाव (Balrampur causeway washed away) की भेंट चढ़ गई। पुलिया बह जाने से दोनों गांवों के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। सबसे अधिक परेशानी किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों और रोजाना आने-जाने वाले ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है। वर्तमान में धान रोपाई और खेती-किसानी का कार्य पूरे क्षेत्र में तेजी से चल रहा है, ऐसे समय में मार्ग बंद होने से कृषि कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो गया है। रपटा बह जाने से पानी का तेज बहाव जारी है। लोग जान जोखिम में डालकर इस मार्ग पर आवागमन कर रहे हैं।
पुलिया क्षतिग्रस्त (Causeway washed away) होने के कारण ट्रैक्टर, बाइक, चारपहिया वाहन सहित अन्य सभी वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। किसान अपने खेतों तक खाद, बीज, कृषि उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री नहीं पहुंचा पा रहे हैं। कई किसानों को लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर कोई वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध नहीं है।
सबसे चिंताजनक स्थिति ग्रामीणों की है, जिन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी के तेज बहाव के बीच पैदल रास्ता पार करना पड़ रहा है। जान जोखिम में डालकर लोग एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंच रहे हैं। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो किसी भी समय बड़ा हादसा (Incident) होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जब पत्रिका की टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य बेहद चिंताजनक था। एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर तेज बहाव के बीच सावधानीपूर्वक रास्ता पार करती दिखाई दी। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि मजबूरी में लोग अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि रपटा पुलिया की तत्काल मरम्मत अथवा अस्थायी वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए, ताकि आवागमन जल्द से जल्द बहाल हो सके।
ग्रामीणों ने बताया कि इसी स्थान पर मार्च माह में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से नई पुलिया (New bridge) निर्माण के लिए प्रशासनिक आदेश जारी किया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि बारिश से पहले निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई। यदि समय पर निर्माण कार्य शुरू हो जाता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों में हो रही देरी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हर वर्ष बरसात के मौसम में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से इस मार्ग की समस्या बनी हुई है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलते हैं।