Banswara Road Accident : बांसवाड़ा के सुरपुर में मिनी ट्रक और टैम्पो की भिड़ंत से मासूम सहित एक ही परिवार की दो बहुओं की मौत हो गई। मंगलवार सुबह दो चिताओं पर मासूम और दो बहुओं की अंत्येष्टि की गई। पूरा गांव रो पड़ा। तीन सौ घरों में चूल्ह नहीं जले। पढ़ें यह स्टोरी।
Banswara Road Accident : बांसवाड़ा के सुरपुर में दो दिन पहले मिनी ट्रक और टैम्पो भिड़ंत से मासूम सहित एक ही परिवार की दो बहुओं की मौत हो गई। पुलिस कार्रवाई के उपरांत मंगलवार सुबह शव सागतलाई ले जाए गए, तो मईड़ा परिवार की दशा देखकर पूरा गांव रो पड़ा। बिलखते परिजनों को जैसे-तैसे गांव के लोगों ने संभाला। दोपहर बाद दो चिताओं पर तीनों की अंत्येष्टि के बाद गांव में खामोशी छाई रही।
हादसे ने सागतलाई के 68 साल के बुजुर्ग शंकरलाल मईड़ा के तीन बेटों में सबसे बड़े बहादुर की पत्नी सविता और सबसे छोटे विकास की बहू दीपिका के साथ तीन साल के बच्चे हितेश की जान ले ली, वहीं मझले अर्जुन की बहू काली अब भी अस्पताल में है। शंकरभाई की पत्नी का करीब दस साल पहले निधन हो गया था।
एक बेटी शादी के बाद ससुराल चली गई, तो पीछे बेटे और उनकी बहुएं ही सेवा कर रही थीं। घटना ने पूरे मईड़ा परिवार को तोड़कर रख दिया। उन्हें संबल देने गांव के कुछ युवा तो दो दिन से कामकाज छोड़कर डटे। इसके बावजूद मंगलवार को बच्चे-बड़े सभी को संभालना मुश्किल रहा।
दोपहर में विलाप के बीच दो अर्थियां एक साथ घर से उठाई गईं तो बच्चे का शव गोद में लेकर भारी मन से परिजन श्मशान के लिए निकले। फिर मां-बेटे को एक साथ और दूसरी अर्थी पर घर की बड़ी बहू का अंतिम संस्कार कराया गया। यहां समाज के करीब तीन सौ घर हैं, जिनके चूल्हे तक नहीं जले। मामले पर पूर्व विधायक हरेंद्र निनामा भी ढांढस बंधाने पहुंचे और मदद का आश्वासन दिया।
मईड़ा परिवार के लोग रविवार को जेतोर गांव में नोतरे कार्यक्रम से लौट रहे थे। उनका टैम्पो सुरपुर स्कूल के पास मिनी ट्रक से आमने-सामने टकरा गया। दीपिका पत्नी विकास, उनका तीन साल का बेटा हितेश, जेठानी सविता पत्नी बहादुर मईड़ा और काली पत्नी अर्जुन मईड़ा सहित 7 लोग गंभीर रुप से घायल हुए। बालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दीपिका और सविता ने उदयपुर एमबी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। शव मंगलवार को सुपुर्द कर अंतिम संस्कार किया गया।
पेशे से शिक्षक और मईड़ा परिवार में चचेरे भाई रूपलाल मईड़ा ने बताया कि तीन भाई खेती और मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार पाल रहे हैं। इनमें बहादुर और विकास मिल में ठेका श्रमिक हैं। दो बच्चे और एक बेटी का पालन बहादुर के वेतन से नाकाफी होने से उसकी पत्नी सविता हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में निजी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी कर मदद कर रही थी। दूसरी ओर, विकास की पत्नी दीपिका गृहिणी थी। मासूम बच्चा खोने से अब पीछे उसके एक बेटी ही है।