Banswara News : बांसवाड़ा जिले में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई गई गेहूं की फसल पर ग्लूम ब्लॉच (काला धब्बा) का संकट मंडरा रहा है। किसान चिंतित हैं। कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है।
Banswara News : बांसवाड़ा जिले में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई गई गेहूं की फसल पर ग्लूम ब्लॉच (काला धब्बा) का संकट मंडरा रहा है। बीते वर्षों में इस प्रकोप ने गेहूं फसल को खूब नुकसान पहुंचाया। इस कारण कृषि अनुसंधान केंद्र अलर्ट मोड पर है और किसानों के लिए सलाह जारी की गई है।
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि यह बीमारी फफूंदी के कारण होती है। इसके लगने से गेहूं के दाने पर धब्बा पड़ जाता है और दाना भी छोटा हो जाता है। इससे उपज घट जाती है। पर, अभी बाली निकलना शुरू हो चुकी है। इसलिए समयबद्ध तरीके से दवा का छिड़काव कर दिया जाए तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। जिले में एक लाख से अधिक हेक्टेयर क्षेत्रफल में है गेहूं की फसल तैयार हो रही है।
जोनल डायरेक्टर डॉ. हरगिलास मीणा ने बताया कि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षो से गेहूं की फसल में काला धब्बा या ग्लूम ब्लॉच बीमारी का प्रकोप देखा गया है। इस रोग से फसल की उपज एवं गुणवता में कमी होती है। इसलिए किसानों को गेहूं की फसल में काला धब्बा या ग्लूम ब्लॉच रोग के रोकथाम के लिए प्रोपीकोनाझोल 25 ई.सी/1 मिली/लीटर पानी दर से बाली बनने की अवस्था पर छिड़काव करने की सलाह दी है।
1- पत्तियों पर काले धब्बे या ग्लूम ब्लॉच दिखाई देते हैं।
2- पत्तियों का रंग पीला या भूरा हो जाता है।
3- पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
4- फसल की उत्पादकता घटती है।
1- फफूंदी के कारण।
2- अधिक आर्द्रता।
3- उच्च तापमान।
4- खराब मिट्टी की स्थिति।
(जैसा कि वैज्ञानिकों ने बताया)