बांसवाड़ा

Rajasthan: राजस्थान में हुई अनोखी शादी, टापू से निकली बारात, नाव में सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा दूल्हा

Rajasthan Unique Wedding: बांसवाड़ा के आनंदपुरी क्षेत्र में एक अनोखी बारात ने लोगों का ध्यान खींच लिया, जहां दूल्हा नाव में सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा।

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नाव में निकलती बारात। फोटो- पत्रिका

बांसवाड़ा। जिले के आनंदपुरी उपखंड क्षेत्र में रविवार को एक बारात निकली, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। ग्राम पंचायत डोकर के मालीपाड़ा गांव में माही-जाखम-कड़ाना बैकवाटर नदी के बीच बसे एक टापू से युवक दिनेश पुत्र धना पटेल अपनी दुल्हन लाने के लिए नाव में सवार होकर निकला। नदी के पानी के बीच नाव में बैठी बारात, आदिवासी लोकगीतों की गूंज और पारंपरिक माहौल ने इस विवाह को खास बना दिया। 50 से अधिक बारातियों के लिए किराए की नाव की व्यवस्था की गई।

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बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण

दूल्हा और बाराती पारंपरिक वेशभूषा में नाव में सवार होकर मालीपाड़ा गांव से डोकर किनारे की ओर रवाना हुए। नदी के बीच से गुजरती बारात को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे। बारातियों ने नाव के सफर के दौरान आदिवासी लोकगीत गाए और ढोल की थाप पर खुशियां मनाईं। कुछ दूरी तक नदी में सफर तय करने के बाद बाराती किनारे पहुंचे, जहां से सभी करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। मुख्य सड़क पर बारातियों के लिए वाहन खड़े किए गए थे। इसके बाद सभी बाराती वाहनों में सवार होकर आनंदपुरी कस्बे के पाड़ोला गांव पहुंचे, जहां विवाह की रस्में संपन्न हुईं।

17 परिवारों के लगभग 80 लोग

ग्रामीणों का कहना है कि बैकवाटर क्षेत्र में बसे टापू के लोगों के लिए नाव ही जीवनरेखा है। टापू पर पिछले कई साल से करीब 17 परिवारों के लगभग 80 लोग निवास कर रहे हैं। यहां रहने वाले लोगों का जीवन आज भी नदी और नाव के सहारे चलता है। अस्पताल जाना हो, बच्चों को विद्यालय पहुंचाना हो, राशन सामग्री लानी हो या फिर विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रम, हर काम के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।

गौरतलब है कि इससे पहले पाली जिले के सादड़ी क्षेत्र में भादरास निवासी सुरेश चौधरी ने अपनी बारात को बिल्कुल अलग अंदाज में निकालकर सबका ध्यान आकर्षित किया था। पिछले 9 वर्षों से चीन के शंघाई में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार से जुड़े सुरेश जब अपनी शादी के लिए वतन लौटे, तो उन्होंने दिखावे से दूर रहकर अपनी जड़ों से जुड़ने का फैसला किया। सुरेश की बारात मुंडारा गांव तक पारंपरिक बैलगाड़ियों में निकाली गई थी। खुद दूल्हा सजी-धजी बैलगाड़ी में राजस्थानी वेशभूषा पहनकर सबसे आगे बैठे नजर आए थे।

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