कच्ची शराब बनाने वालों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास
हकीम पठान. बारां. प्रदेश में हथकढ़ कच्ची शराब से मृत्यु के मामले सामने आने के बाद एक बार फिर सरकार को लम्बे समय से सुस्त पड़ी नवजीवन योजना की याद आ गई। अब इस योजना में प्राण वायु फूंकने के लिए संभाग के चारों जिलों में ऑपरेशन उदय शुरू किया जा रहा है। इस बार योजना को पहले की तरह सामाजिक न्याय एवं अघिकारिता विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। कलक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक खुद ऑपरेशन उदय की मॉनिटरिंग करेंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को इसके नोडल विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में 714 परिवार हथकढ़ शराब कारोबार से जुड़े हुए हंै।
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लाना होगा बदलाव
अब तो आबकारी विभाग के अधिकारी भट्टियां सुलगाकर कच्ची शराब बनाने के अवैध कारोबार में जुड़े लोगों के गांव व घरों तक पहुंचने लगे है। लोगों को शराब के अवैध कारोबार से तौबा करने तथा नवजीवन शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सर्वे में जानकारी भी ली जा रही है कि चयनित परिवारों में से कितने परिवारों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है। रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान कौशल आजीविका विकास निगम के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा।
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होगा डाटाबेस तैयार
संभाग में अवैध हथकढ़ शराब के निर्माण पर रोक, उत्पादन, परिवहन, संग्रहण एवं बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई व उससे जुड़े परिवारों का सर्वे कर उनके सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास तथा पुनर्वास के लिए ऑपरेशन उदय अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। इसके तहत प्रभावित परिवारों का सर्वे कर उनका डाटाबेस तैयार किया जाएगा। जिले के एक गांव ढाणी को ऑपरेशन उदय के तहत पायलेट मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस गांव चिन्हित एसटी एससी व अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ा जाएगा। सरकारी छात्रावासों आवासीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा। उच्च शिक्षा के कोचिंग के लिए अनुदान दिलाया जाएगा।
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नवजीवन योजना के संचालन को लेकर संभागीय आयुक्त के निर्देशानुसार ऑपरेशन उदय शुरू किया गया है। इसके तहत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से चिन्हित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। चांचोड़ा व लक्ष्मीपुरा में 69 व शाहाबाद में 34 लोगों का पुर्नवास के लिए चिन्हित किया है। शुक्रवार को विलासगढ़ में शिविर लगाया गया है।
तपेश चन्द जैन, जिला आबकारी अधिकारी
एक दशक पूर्व से नवजीवन योजना संचालित है। पहले जिले में भी गांव में सड़क नालियों के काम हुए थे। पिछले वर्ष भी सर्वे कर पुराने व वर्तमान में लिप्त करीब 714 परिवारों को चिन्हित किया गया है। अभी मांगरोल व शाहाबाद में महिलाओं के लिए प्रशिक्षण शुरू किया गया है। पुरुषों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
आरके वर्मा, उप निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, बारां