बरेली

बरेली में रामगंगा नदी के किनारे अवैध कब्जे पर लगेगी रोक: 166 गांवों में ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचेगी सरकार

Bareilly News: बरेली में रामगंगा नदी के किनारे अवैध कब्जों और पक्के निर्माण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर सीमांकन कराया जा रहा है, जिसके तहत रामगंगा के दोनों किनारों पर पिलर लगाए जाएंगे।
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May 28, 2026
Boundary pillars marking Ramganga flood plain villages against illegal encroachments
रामगंगा किनारे शुरू होगा सीमांकन अभियान (फोटो सोर्स - पत्रिका)

रामगंगानदी के किनारे बरेली में अवैध कब्जों और पक्के निर्माण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर सीमांकन कराया जा रहा है। इसके तहत रामगंगा के दोनों किनारों पर पिलर लगाए जाएंगे। जिले के 166 गांव फ्लड प्लेन जोन की सीमा में शामिल किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि नदी की जमीन पर लगातार बढ़ते कब्जों की वजह से हर साल बाढ़ का खतरा और तबाही बढ़ रही है।

सिंचाई विभाग और बाढ़ खंड मुरादाबाद की देखरेख में चल रही इस योजना के लिए 2.24 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है। हालांकि , पिलर लगाने के लिए निकाले गए पहले टेंडर में कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। अब विभाग ने री-टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर फाइनल होते ही मौके पर सीमांकन और पिलर लगाने का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा।

हर साल बाढ़ से डूबते हैं गांव और खेत

रामगंगा नदी में बरसात के दौरान हर साल जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ की स्थिति बनती है। कई गांवों में खेत पानी में समा जाते हैं और मकानों तक में पानी घुस जाता है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया कि नदी की भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो रहा है। इसी को देखते हुए नदी के दोनों किनारों को फ्लड प्लेन जोन घोषित किया गया है।

166 गांव आए फ्लड प्लेन जोन में

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी की ओर से कराए गए सर्वे में जिले के 166 गांवों को चिन्हित किया गया है। इनमें सदर तहसील के 52 गांव, आंवला के 43, फरीदपुर के 28 और मीरगंज तहसील के 43 गांव शामिल हैं। इन गांवों में नदी के दोनों ओर पिलर लगाकर स्पष्ट सीमा तय की जाएगी ताकि भविष्य में कोई निर्माण या कब्जा न हो सके। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अमित किशोर ने बताया कि पिलर लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया दोबारा कराई जा रही है। टेंडर फाइनल होने के बाद सीमांकन और पिलर लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य बाढ़ के खतरे को कम करना और नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना है।

Updated on:
28 May 2026 08:15 pm
Published on:
28 May 2026 08:15 pm