बाड़मेर में भर्ती घोटाले के विरोध में बेरोजगार युवाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखा। युवाओं ने रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की।
बाड़मेर। राजस्थान में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, ओएमआर शीट फर्जीवाड़े तथा भर्ती घोटालों के खिलाफ मंगलवार को बाड़मेर में बेरोजगार युवाओं का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में युवाओं ने शहर के शहीद सर्किल से रैली निकालते हुए कलक्ट्रेट का घेराव किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप ले सकता है। प्रदर्शन का नेतृत्व बेरोजगार युवाओं ने किया।
युवाओं ने ज्ञापन में रोस्टर पुनः संधारित करने, ओएमआर शीट घोटाले की सीबीआई जांच, आरपीएससी और अधीनस्थ चयन बोर्ड को भंग करने, नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया समाप्त कर एक परीक्षा-एक तिथि प्रणाली लागू करने तथा बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए निश्चित प्रतिशत तय करने की मांग रखी। साथ ही वर्ष 2018 (कांग्रेस सरकार) से 2025 तक हुई सभी भर्तियों में प्रयुक्त ओएमआर शीट्स की सीबीआई जांच की मांग भी की।
धरने में कांग्रेस नेताओं ने युवाओं का समर्थन किया और कांग्रेस व भाजपा दोनों सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में मजबूती से उठाएंगे। हेमाराम चौधरी ने कहा कि यह घोटाला किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि कई साल से चली आ रही मिलीभगत का परिणाम है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार में सचिन पायलट ने पैदल रैली निकालकर आरपीएससी को भंग करने की मांग की थी, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बायतु विधायक हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार बाबूलाल कटारा ने जांच में स्वीकार किया है कि वह 1.20 करोड़ रुपए की डील से आरपीएससी सदस्य बना। उन्होंने मांग की कि कटारा और जिन्हें पैसे दिए गए, उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाए।
चौधरी ने कहा कि युवाओं के हित में निर्णय मुख्यमंत्री अकेले नहीं, बल्कि कैबिनेट और 200 विधायक करते हैं। उन्होंने कैबिनेट मंत्रियों से अपील की कि वे लालच छोड़कर मजबूत प्रस्ताव रखें। उन्होंने निर्दलीय विधायक रविंद्रसिंह भाटी और डॉ. प्रियंका चौधरी से भी इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की। हरीश चौधरी ने नकल, पेपर लीक और इंटरव्यू घोटालों का उल्लेख करते हुए आरपीएससी और चयन बोर्ड को भंग करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि युवाओं को न्याय तभी मिलेगा जब नौकरियां योग्यता आधारित होंगी।
धरने में अभ्यर्थियों का गुस्सा साफ झलका। युवाओं ने कहा कि सरकार स्पष्ट कर दे कि यदि नौकरी सिर्फ पैसे वालों को ही देनी है तो वे मेहनत व समय क्यों बर्बाद करें। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में पेपर लीक हुए और भाजपा शासन में ओएमआर घोटाला सामने आया। दोनों सरकारें मिली हुई हैं और योग्य व गरीब घरों के बच्चे बेरोजगार बैठे हैं, जबकि रसूखदार और पैसे वाले नौकरी पा रहे हैं।
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बेरोजगार युवाओं ने सरकार को दस दिन का समय दिया और चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं निकला तो राजस्थानभर के युवा जयपुर कूच करेंगे। धरने का संचालन राजेंद्र कड़वासरा ने किया। धरने को पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, उदाराम मेघवाल, लक्ष्मणसिंह गोदारा, आजादसिंह राठौड़, लक्ष्मण वडेरा, पांचाराम, भूपेंद्र मेघवाल, भूराराम सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। बेरोजगार युवा नरेन्द्र, देवाराम, सांगाराम, हिंगलाज दान सहित कई युवाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त की।