बेमेतरा

शव लेकर दलदल में फंसा ट्रैक्टर, ग्रामीणों ने कीचड़ में उतरकर खींचा, बेमेतरा के दो गांवों की दर्दनाक तस्वीर

Bemetara News: बेमेतरा जिले के दो गांवों से सामने आई तस्वीरें सरकारी विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। बेलौदीकला और बेलतरा में मुक्तिधाम तक पहुंचने वाली सड़क बारिश में दलदल में तब्दील हो गई है।
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Aug 09, 2026
Chhattisgarh News
गांवों की दर्दनाक तस्वीर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bemetara Cremation Ground: बेमेतरा जिले में विकास के तमाम बड़े-बड़े दावों के बीच प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिले के बेरला विकासखंड के ग्राम बेलौदीकला और साजा विकासखंड के ग्राम बेलतरा से आई बदहाली की ने तस्वीर ने ग्रामीण अंचलों में जमीनी धरातल पर भयावह स्थिति को सामने लाया है। दोनों गांवों में वर्षों से मुक्तिधाम (श्मशान घाट) तक जाने के लिए पक्की सडक़ की मांग की जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की उपेक्षा के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।

बारिश के मौसम में मुक्तिधाम जाने वाले कच्चे रास्ते गहरे दलदल में तब्दील हो चुके हैं। आलम यह है कि इंसान को जीते जी सडक़ों के गड्ढों का सामना करना पड़ता है और मृत्यु के बाद उसकी अंतिम यात्रा में भी संघर्ष करना पड़ता है। बेलौदीकला का वीडियो सोशल मीडिया में जिस तरह से वायरल हो रहा है उससे प्रशासन तंत्र की जमकर किरकिरी हो रही है।

बेलौदीकला का वायरल वीडियो ने खोली अमानवीयता की पोल

ग्राम बेलौदीकला में एक युवा ग्रामीण के आकस्मिक निधन के बाद जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर लेकर मुक्तिधाम की ओर निकले, तो करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे कच्चे रास्ते ने उनकी धैर्य की परीक्षा ली। तालाब के किनारे बना यह कच्चा मार्ग लगातार हुई बारिश के कारण पूरी दलदल में तब्दील हो चुका था।

पैदल चलना तो दूर, इस रास्ते से गुजरना किसी जानलेवा जोखिम से कम नहीं लग रहा था। स्थिति तब और भी गंभीर और कष्टदायक हो गई जब शव लेकर जा रहा ट्रैक्टर भारी कीचड़ में बीच रास्ते में ही बुरी तरह फंस गया। काफी प्रयासों के बाद भी जब ट्रैक्टर दलदल से बाहर नहीं निकल सका, तो शव यात्रा में शामिल दर्जनों ग्रामीणों को अपने जूते-चप्पल उतारकर घुटने भर गहरे कीचड़ में उतरना पड़ा।

ग्रामीणों ने खुद भारी मशक्कत करते हुए ट्रैक्टर को खींचने और धक्का देने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंतत: स्थिति को संभालने के लिए गांव से दूसरा ट्रैक्टर मंगाना पड़ा। घंटों चले इस संघर्ष और कड़ी मशक्कत के बाद ही शव को मुक्तिधाम तक पहुंचाया जा सका। अंतिम संस्कार में शामिल होने गए लोग खुद कीचड़ से पूरी तरह लथपथ हो चुके थे और इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद बेलौदीकला के ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। गांव के सरपंच, पंचों और वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से मुक्तिधाम तक पक्की सडक़ और वहां आवश्यक सुविधाओं के निर्माण के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

एकजुट हुए ग्रामीण, अब सहन नहीं करेंगे उपेक्षा

इस बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने में गांव के वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधि और नागरिक एकजुट हो गए हैं। सरपंच चंपा देवी चौहान, पंच ठाकुर राम पटेल, महेश साहू, धर्मेंद्र साहू, कल्याण सिंह राजपूत, सरस्वती पटेल, नीलम निषाद, मुकेश साहू, पूर्व सरपंच अमोला बाई पटेल तथा वरिष्ठ जन बल्लूराम साहू, नरेंद्र आदि शामिल है। विष्णु साहू, संतराम साहू, दुर्गा वर्मा, ऋषि सिंह राजपूत और सोनू चौहान सहित दर्जनों ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि इस मार्ग का तत्काल सी.सी. रोड या पक्की सडक़ के रूप में निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र जनआंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

बेलतरा में भी स्थिति बेलौदीकला जैसी ही

बेलतरा में मुक्तिधाम जाने वाला रास्ता पिछले कई वर्षों से बदहाल स्थिति में है। ग्रामीणों का कहना है कि वे मुक्तिधाम मार्ग पर सीसी. रोड या कम से कम मुरमीकरण कराने के लिए जिला प्रशासन के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। मानसून के इस मौसम में कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भर गया है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने वाले परिजनों और ग्रामीणों को भारी समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत बेलतरा की सरपंच भारती मुकेश टंडन ने बताया कि पंचायत द्वारा पिछले एक जून को ही कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर जिला खनिज न्यास मद से 900 मीटर लंबा सी.सी. रोड स्वीकृत करने की मांग की गई थी। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने जल्द स्वीकृति का भरोसा दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरपंच और ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सडक़ निर्माण की स्वीकृति नहीं दी तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

उनके पास अब तक मांग पत्र नहीं आया है। मामले की जानकारी लेकर वे निराकरण की दिशा में ठोस पहल करेंगी। - दिव्या ठाकुर, सीईओ

Updated on:
09 Aug 2026 11:38 am
Published on:
09 Aug 2026 11:38 am