भरतपुर

सर्राफा व्यापारी योगेंद्र चोपड़ा हत्याकांड: ‘नींद तक नहीं आती’, बीते 104 दिनों से ठीक से सोया तक नहीं परिवार, कातिल अब भी फरार

Yogendra Chopra Murder Case: '104 दिन से परिवार सोया नहीं है। हर दिन न्याय की मांग करते हैं। अधिकारियों से खूब कह चुके हैं। अब तो ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। पुलिस अभी तक हत्यारों को नहीं पकड़ पाई है। मेरे परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है।'
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Jul 07, 2026
Jeweller Yogendra Chopra Murder
Jeweller Yogendra Chopra Murder Case (Patrika Photo)

Bharatpur-Nadbai Yogendra Chopra Murder Case: भरतपुर: नदबई कस्बे में 25 मार्च को हुए चर्चित सर्राफा व्यापारी योगेंद्र चोपड़ा हत्याकांड का अब तक खुलासा नहीं हो पाने से पूरे कस्बे में गहरा रोष व्याप्त है। घटना के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद की ओर से 72 घंटे के भीतर हत्यारों को पकड़ने का जो वादा किया गया था, वह अब पूरी तरह खोखला साबित होता नजर आ रहा है। 72 घंटे तो दूर, 104 दिन बीत जाने के बावजूद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है। इससे आमजन और मृतक के परिजनों का भरोसा पुलिस व्यवस्था से डगमगाने लगा है।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक तीन कथित षड्यंत्रकारियों को गिरफ्तार किया है। सबसे पहले नितिन निवासी नेवाड़ा थाना हलेना को बाहरी क्षेत्र से पकड़ा गया। इसके बाद राजकुमार सैनी निवासी नगला डिप्टी थाना लखनपुर और श्यामवीर सिंह ठाकुर निवासी गांव खेड़ा ठाकुर (आगरा) को जेल से न्यायालय के प्रोटेक्शन वारंट पर का लाकर पूछताछ की गई।

पुलिस दावा है कि इनसे महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की गई। लेकिन हकीकत यह है कि अब तक हत्या को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस की ये तीन गिरफ्तारी भी किसी रहस्य से कम नहीं है। इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने विशेष टीम एसआईटी का गठन भी किया और लगातार जांच का दावा किया जाता रहा, लेकिन धरातल पर नतीजा शून्य ही नजर आ रहा है।

कस्बे के व्यापारियों और आमजन में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि दिनदहाड़े हुई इतनी बड़ी वारदात के बावजूद पुलिस अब तक हत्यारों को पकड़ने में असफल रही है। मृतक का परिवार 104 दिन से सोया तक नहीं है। पुलिस अभी तक हत्यारों को नहीं पकड़ पाई है। परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है।

एक करोड़ से ज्यादा की चोरी

कोतवाली थाना बयाना के मुख्य द्वार के सामने स्थित एडवोकेट धनीराम के मकान में 14 जून की रात बदमाशों ने धावा बोलकर सोने-चांदी के आभूषण और लाखों रुपए की नकदी पर हाथ साफ कर दिया। पीड़ित परिवार के ही एडवोकेट सत्यपाल ने बताया कि पुलिस में दर्ज कराई गई एफआइआर में करीब 45 तोला सोना, चांदी के आभूषण और तीन लाख रुपए नकद चोरी होना दर्ज कराया गया है।

जबकि वास्तविक रूप से चोरी हुआ सोना करीब 65 से 70 तोला के आसपास है। उनका कहना है कि परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और घटना के इतने दिन बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। थाना प्रभारी रामगिलास गुर्जर का कहना है कि मामले की जांच तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध सुरागों के आधार पर की जा रही है। पुलिस की कई टीमें अनुसंधान में लगी हुई है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। हालांकि, घटना के बीत चुके कई सप्ताह बाद भी चोरों का सुराग नहीं लगने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

यहां 760 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ

बृजनगर, गोकुलधाम कॉलोनी में चार जून 2024 को हुई करीब 80 लाख रुपए की दिनदहाड़े चोरी का प्रकरण अब तक रहस्य बना हुआ है। घटना को 760 दिन का समय गुजर चुका है। डॉ. अनामिका भारद्वाज के अनुसार शाम को लौटने पर मकान के मुख्य दरवाजे और कमरे के ताले टूटे मिले।

जहां अपराध बोलता है, वहां खामोश है कानून

हर तरफ त्राहिमाम। जवाबदेही के अभाव में आम आदमी की आवाज दब सी गई है। लूट…फायरिंग…हत्या…चोरी… व्यापारियों से मारपीट…अवैध शराब बिक्री…जुआ-सट्टा आम बात हो गई है। अनगिनत मुश्किलों में इन दिनों भरतपुर और डीग जिले जकड़े हुए हैं। लेकिन सत्तापक्ष-संगठन से लेकर विपक्ष तक आपसी हितों के टकराव में उलझे हैं। अधिकारियों की मौज है। कोई जीये या मरे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। नदबई में 25 मार्च 2026 को सर्राफा व्यापारी योगेंद्र चोपड़ा की गोली मारकर हत्या और लाखों की लूट के बाद पुलिस ने 72 घंटे में खुलासे का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई। परिवार न्याय मांग रहा है और जिम्मेदार झूठ पर झूठ बोल रहे हैं।

14 जून को बयाना कोतवाली के सामने अधिवक्ता के घर से एक करोड़ रुपए से अधिक का माल चोरी हो गया। नगर में चार जून 2024 को डॉक्टर के घर हुई 80 लाख की चोरी इतना समय गुजरने के बाद भी अब तक अनसुलझी पहेली बनी है। चार जुलाई की रात चिकसाना थाना क्षेत्र में परचून व्यापारी प्रमोद कुमार मितल पर फायरिंग कर बदमाश रुपए से भरा बैग लूटकर ले गए।

कुछ देर बाद ही सेवर थाना इलाके में गोलपुरा मोड पर व्यापारी राजू शर्मा को गोली मारकर बदमाशों ने पांच लाख रुपए लूटने की कोशिश की और व्यापारी पांच जुलाई की शाम अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गए। यहां भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पुलिस के खिलाफ परिजनों ने गुस्सा जाहिर करना चाहा तो उन्हें ही रोकने की कोशिश की गई। अपराधी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे है और खाकी सफाई देने में व्यस्त दिखाई देती है।

सवालों की फेहरिस्त लंबी है। क्या पुलिस की प्राथमिकता केवल दिखावटी कार्रवाई तक सीमित रह गई है? क्या थानों का मुखबिर तंत्र पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुका है? क्या रात की गश्त केवल कागजों तक सीमित है? क्या गली-मोहल्लों में खुलेआम बिक रही अवैध शराब, गांजा, स्मैक और चरस पुलिस को दिखाई नहीं देती? यदि सब कुछ नजर आ रहा है तो प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि नजर ही नहीं आ रहा तो पुलिस की इससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है?

सच यह है कि कमजोर पुलिसिंग ने अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंचा दिए है। आम आदमी भय के साये में जीने को मजबूर है। दरअसल खाकी का इकबाल वहीं कायम रह सकता है, जहां अपराधी कानून से डरते हों, लेकिन जब अपराधी ही कानून को चुनौती देने लगे, तब यह पुलिस की नाकामी का संकेत है।

जब व्यवस्था में ही दीमक लग जाए तो केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, दावे और आंकड़े काम नहीं आते। जरूरत जवाबदेही तय करने, लापरवाह अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने और अपराधियों में कानून का वास्तविक भय पैदा करने की है। अन्यथा यह निष्क्रियता और संवेदनहीनता न्याय को मजाक बनाकर छोड़ देगी।

विडंबना यह भी है कि जिले के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। जो कभी कानून-व्यवस्था पर बड़ी-बड़ी बातें करते थे, वे आज मौन साधे बैठे है। ऐसा लगता है मानो सबने 'तू मेरी मत कहना, मैं तेरी नहीं कहूंगा' का अलिखित समझौता कर लिया हो। यही स्थिति रही तो जनता का विश्वास केवल पुलिस से ही नहीं, पूरे शासन-प्रशासन से उठ जाएगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि जब दीमक सिस्टम में बस जाए, तो केवल दावे नहीं, मजबूत कदम उठाने की जरूरत होती है। वरना न्याय की उम्मीद एक मजाक बनकर रह जाती है।
…मेघश्याम पाराशर

Updated on:
07 Jul 2026 04:16 pm
Published on:
07 Jul 2026 04:16 pm