भिलाई

सादे कपड़ों में BSP प्लांट पहुंची 12 अफसरों की टीम! एक नाम की दो फर्में, अलग GST नंबर से हेराफेरी का हुआ बड़ा खुलासा

BSP Scrap Theft: BSP Scrap Scam में जांच का दायरा बढ़ गया है। एक नाम की दो फर्मों और अलग-अलग GST नंबर के जरिए चोरी के स्क्रैप को कागजों में वैध दिखाने की आशंका है। GST विभाग और BSP की टीम दस्तावेज व लेनदेन खंगाल रही है।
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Aug 30, 2026
BSP Scrap Scam
BSP Scrap Scam: एक नाम की दो फर्में, अलग-अलग GST नंबर(photo-patrika)

BSP Scrap Scam: छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से कथित लौह स्क्रैप चोरी के मामले की जांच अब केवल चोरी तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की प्राथमिक जांच और चालान में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर अब चोरी के स्क्रैप को बाजार में खपाने और उसे कागजों में वैध कारोबार का हिस्सा दिखाने की आशंका की जांच की जा रही है। मामले में जीएसटी विभाग और बीएसपी की आंतरिक टीम भी दस्तावेजों और लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

Bhilai Steel Plant: एक नाम की दो फर्में, अलग-अलग GST नंबर

पुलिस जांच में ‘एके ट्रेडर्स’ नाम से संचालित दो अलग-अलग फर्मों की जानकारी सामने आई है। दोनों फर्मों के पते अलग हैं और उनके जीएसटी नंबर भी अलग बताए गए हैं। जांच के अनुसार, एक फर्म अकलोरडीह में जबकि दूसरी ट्रांसपोर्ट नगर, हथखोज में संचालित थी। आशंका है कि चोरी का स्क्रैप पहले अकलोरडीह स्थित फर्म तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद दूसरी फर्म के नाम से बिल तैयार कर स्क्रैप को दस्तावेजों में वैध कारोबार का हिस्सा दिखाया जाता था। पुलिस अब इन बिलों और फर्मों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रही है।

250 टन स्क्रैप और 10 वाहन जब्त

भिलाई-3 थाना पुलिस ने 26 मई को ग्राम अकलोरडीह में दबिश देकर करीब 250 टन लौह स्क्रैप और 10 वाहन जब्त किए थे। जब्त संपत्ति की कीमत लगभग 3.22 करोड़ रुपए बताई गई है। मामले में पुलिस अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच के दौरान पुलिस को स्क्रैप के परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

बैंक खातों के लेनदेन में भी अंतर

जांच में दोनों फर्मों के बैंक खातों की गतिविधियों को भी खंगाला गया है। पुलिस के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एके ट्रेडर्स और आरोपी संजय सिंह के पुत्र अभय सिंह के बैंक खाते में बड़े लेनदेन मिले हैं, जबकि अकलोरडीह स्थित फर्म के खाते में अपेक्षाकृत कम लेनदेन दर्ज है। पुलिस ने बैंकिंग और अन्य वित्तीय दस्तावेज जीएसटी विभाग को सौंप दिए हैं। अब विभाग इन लेनदेन और जारी किए गए बिलों का मिलान कर रहा है।

फर्जी बिल के जरिए स्क्रैप को वैध दिखाने की आशंका

जांच एजेंसियों को आशंका है कि चोरी किए गए स्क्रैप को सीधे बेचने के बजाय उसे दस्तावेजों में वैध दिखाने के लिए बिलिंग का सहारा लिया गया। यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है, तो मामला केवल स्क्रैप चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फर्जी दस्तावेज, टैक्स चोरी और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच भी आगे बढ़ सकती है। हालांकि, जीएसटी चोरी या किसी कर अनियमितता की वास्तविक राशि का पता विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

सादे कपड़ों में BSP प्लांट पहुंची 12 सदस्यीय टीम

इधर, बीएसपी सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले करीब 12 अधिकारियों की टीम तीन लग्जरी वाहनों में सादे कपड़ों में प्लांट पहुंची। टीम ने एसएमएस-3, स्क्रैप यार्ड सहित कई संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों का दौरा किया। सीआईएसएफ अधिकारियों ने भी टीम के प्लांट पहुंचने की पुष्टि की है। हालांकि, यह टीम बीएसपी की आंतरिक जांच एजेंसी की थी या किसी बाहरी एजेंसी की, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जांच आगे बढ़ने पर खुल सकता है पूरा नेटवर्क

पुलिस, जीएसटी और बीएसपी स्तर पर अलग-अलग दस्तावेजों की पड़ताल के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड, बिलिंग और स्क्रैप के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों के मिलान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चोरी के माल को वैध दिखाने का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित होता था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

Updated on:
30 Aug 2026 07:58 am
Published on:
30 Aug 2026 07:58 am