
250 टन स्क्रैप चोरी के बाद जांच तेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)
BSP Scrap Theft: भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद जीएसटी विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है। अब बीएसपी के चार प्रमुख गेटों पर रखे ब्लैकलिस्ट रजिस्टर और वाहनों के आवक-जावक से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि ब्लैकलिस्ट होने के बाद किसी वाहन ने नंबर प्लेट बदलकर दोबारा प्लांट में प्रवेश तो नहीं किया।
भिलाई-3 थाना पुलिस ने 26 मई को ग्राम अगलोरडीह में दबिश देकर 250 टन लौह स्क्रैप और 10 वाहन समेत करीब 3.22 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी। मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें 16 के खिलाफ चालान पेश हो चुका है। जांच में कुछ वाहनों के नंबर प्लेट में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब यह पता लगाया जा रहा है कि नंबर प्लेट बदलकर वाहनों का संचालन किस तरह किया गया।
भिलाई-3 थाना पुलिस के अनुसार जीएसटी विभाग ने मामले से जुड़े वाहनों, फर्मों और खरीदी-बिक्री के दस्तावेज मांगे थे। पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेज विभाग को सौंप दिए हैं। अब जीएसटी टीम आरोपियों की फर्मों, खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड और बीएसपी से माल के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। चारों प्रमुख गेटों के आवक-जावक रजिस्टर भी जांच के दायरे में होंगे।
बीएसपी के बोरिया, डिस्पोजल, रोलिंग और स्टॉक यार्ड गेट से मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती है। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक गेट पर ब्लैकलिस्ट रजिस्टर रखा जाता है। किसी वाहन में गड़बड़ी मिलने पर उसका विवरण दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाता है। संबंधित वाहन की फोटो भी गेट पर लगाई जाती है, ताकि उसे दोबारा प्रवेश न मिले।
जीएसटी सूत्रों के अनुसार ब्लैकलिस्ट रजिस्टर में गड़बड़ी या चोरी के मामलों में पकड़े गए वाहनों के साथ अधिकृत लिफ्टर, सुपरवाइजर, माल की मात्रा और संबंधित पार्टी का विवरण दर्ज रहता है। इन रिकॉर्ड की जांच से पता चल सकता है कि पहले किन वाहनों पर कार्रवाई हुई और क्या ब्लैकलिस्ट किए गए वाहन बाद में नंबर प्लेट बदलकर दोबारा परिवहन में लगाए गए।
स्क्रैप चोरी मामले में संदिग्ध वाहनों के नंबर प्लेट में गड़बड़ी सामने आ चुकी है, लेकिन परिवहन विभाग अब तक जांच के लिए नहीं पहुंचा। पुलिस ने संदिग्ध वाहनों के दस्तावेज मांगे हैं, जीएसटी विभाग रिकॉर्ड खंगाल रहा है और एचटीसी परिसर में जांच के दौरान कई नंबर प्लेट मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल आरटीओ की चुप्पी पर है।
नंबर प्लेट बदली गई या नहीं, वाहन का वास्तविक रजिस्ट्रेशन किसके नाम है और फर्जी नंबर से वाहन बीएसपी में आया-जाया तो नहीं… इन सवालों का जवाब आरटीओ की जांच से ही मिल सकता है। जब मामले में वाहन ही जांच का अहम सिरा हैं, तो परिवहन विभाग की टीम अब तक मौके पर क्यों नहीं पहुंची?
जांच में देरी से कहीं अहम सुराग कमजोर तो नहीं हो रहे? पुलिस और जीएसटी की सक्रियता के बीच आरटीओ की निष्क्रियता अब सवालों के घेरे में है। सवाल उठता है कि जब चोरी के मामले में वाहनों की भूमिका संदिग्ध है, तो आरटीओ की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? क्या विभाग किसी रिपोर्ट या निर्देश का इंतजार कर रहा है? नंबर प्लेट और वाहन दस्तावेजों की जांच में देरी से कहीं अहम सुराग दब तो नहीं रहे हैं?
Updated on:
29 Aug 2026 04:41 pm
Published on:
29 Aug 2026 04:41 pm
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