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BJP Chhattisgarh: अब पता चलेगा किस नेता में कितना दम! BJP ने निकाय चुनाव में बांटी बड़ी जिम्मेदारियां

Municipal Elections Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने 15 निकायों में प्रभारी-सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। विधायकों, सांसदों और महापौरों समेत बड़े नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है।
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BJP Chhattisgarh

BJP Chhattisgarh: निकाय चुनाव में विधायकों-सांसदों की ड्यूटी(photo-patrika)

BJP Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के रायपुर में आगामी निकाय चुनाव भाजपा के लिए केवल प्रत्याशियों की जीत-हार का मुकाबला नहीं रहने वाला है। यह चुनाव संगठन की जमीनी पकड़ और नेताओं की राजनीतिक क्षमता की भी परीक्षा बन सकता है। पार्टी संगठन ने 15 निकायों में चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए विधायकों, सांसदों, महापौर, संभाग प्रभारियों और जिला संगठन के पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

पार्टी की रणनीति चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही स्थानीय संगठन को सक्रिय करने की है। जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं की संगठनात्मक सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और सरकार की योजनाओं को मतदाताओं तक पहुंचाने की क्षमता पर भी नजर रहेगी।

Chhattisgarh Civic Elections: 15 निकायों में नेताओं को मिली जिम्मेदारी

भाजपा ने चुनावी तैयारियों के लिए अलग-अलग निकायों में प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। इनमें विधायक, सांसद, महापौर, संभाग प्रभारी और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर इन नेताओं की भूमिका चुनावी रणनीति तैयार करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने में अहम होगी। पार्टी का प्रयास है कि सभी निकायों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए।

विधायक से लेकर महापौर तक मैदान में

भाजपा ने इस बार निकाय चुनाव की जिम्मेदारी केवल संगठन के पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रखी है। विधायकों से लेकर सांसद और महापौर तक को चुनावी मैदान में उतारा गया है। स्थानीय चुनावों में बूथ प्रबंधन, मतदाताओं से संपर्क और स्थानीय मुद्दों की समझ परिणामों पर सीधा असर डालती है। ऐसे में जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता दिखाने का मौका भी होगा।

नए चेहरों के लिए बड़ी चुनौती

चुनावी जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं में कुछ अनुभवी चेहरों के अलावा कई ऐसे नेता भी हैं, जिनका राजनीतिक अनुभव अभी कुछ वर्षों का ही है। ऐसे में निकाय चुनाव उनके लिए संगठन में अपनी क्षमता साबित करने की चुनौती लेकर आया है। पार्टी नेतृत्व की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन नेता स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट कर पाता है, किसकी पकड़ बूथ स्तर तक मजबूत है और कौन चुनावी परिस्थितियों में बेहतर समन्वय स्थापित कर सकता है।

संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी

भाजपा की कोशिश चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की है। इसके तहत स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों को सक्रिय कर कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ स्थानीय स्तर के मुद्दों को समझना भी इन प्रभारियों की रणनीति का हिस्सा रहेगा।

किन नेताओं को कहां की जिम्मेदारी

भाजपा संगठन ने आगामी निकाय चुनाव को लेकर अलग-अलग नगरीय निकायों में प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। बिरगांव की जिम्मेदारी सौरभ सिंह को प्रभारी और विधायक भावना बोहरा को सहप्रभारी बनाया गया है। नगर निगम भिलाई में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी प्रभारी और सांसद लक्ष्मी वर्मा सहप्रभारी होंगी। रिसाली की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अनुराग सिंह देव और भिलाई-चरोदा की जिम्मेदारी पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा को दी गई है।

वहीं रायपुर नगर निगम में महापौर मीनल चौबे और सभापति सूर्यकांत राठौर को सहप्रभारी बनाया गया है। जामुल नगरपालिका में CSIDC अध्यक्ष राजीव अग्रवाल प्रभारी और दुर्ग महापौर अलका बाघमारे सहप्रभारी होंगी। खैरागढ़ में पूर्व विधायक लाभचंद बाफना और सारंगढ़ में पूर्व विधायक रजनीश सिंह को प्रभारी बनाया गया है। प्रेमनगर नगर पंचायत में ललनप्रताप सिंह प्रभारी और विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते सहप्रभारी होंगी। इसके अलावा नरहरपुर की जिम्मेदारी विधायक नीलकंठ टेकाम और भैरमगढ़ की जिम्मेदारी विधायक चेतराम अटामी को सौंपी गई है।

संगठनात्मक पकड़ की होगी असली परीक्षा

निकाय चुनाव में स्थानीय समीकरण, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भाजपा ने जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी है, उनके लिए यह चुनाव सिर्फ पार्टी की जीत सुनिश्चित करने का अभियान नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक क्षमता साबित करने का अवसर भी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारी संभालने वाले नेता संगठन को कितना सक्रिय कर पाते हैं और स्थानीय स्तर पर पार्टी की रणनीति को चुनावी परिणाम में कितना बदल पाते हैं।