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IIT भिलाई का कमाल! नीलगिरी की पत्तियों से प्लास्टिक कचरे को मिली नई जिंदगी, अब बेकार PET बोतलों से बनेंगे 3D प्रिंटिंग प्रोडक्ट

IIT Bhilai Research: IIT भिलाई के वैज्ञानिकों ने नीलगिरी की पत्तियों से तैयार ग्रीन कैटेलिस्ट की मदद से PET प्लास्टिक कचरे को 3डी प्रिंटिंग में उपयोगी इंजीनियरिंग सामग्री में बदलने की नई तकनीक विकसित की है।
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Aug 04, 2026
IIT Bhilai Research
IIT Bhilai Research: IIT भिलाई का कमाल!(photo-patrika

IIT Bhilai Research: प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या के बीच छत्तीसगढ़ के IIT भिलाई के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पर्यावरण अनुकूल तकनीक विकसित की है, जिससे बेकार पड़ी पीईटी (PET) प्लास्टिक की बोतलों को उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग सामग्री में बदला जा सकेगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नीलगिरी की पत्तियों से तैयार ग्रीन कैटेलिस्ट (हरित उत्प्रेरक) का उपयोग किया गया है। भविष्य में इस सामग्री का उपयोग 3डी प्रिंटिंग, इंजीनियरिंग प्रोटोटाइप और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट का आवेदन भी किया गया है।

Plastic Waste Recycling: आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों ने किया शोध

यह शोध आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. संजीब बनर्जी के नेतृत्व में शोधार्थी प्रियंक सिन्हा, भरतभूषण मेश्राम और ओंकारनाथ वर्मा ने किया है। शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Materials Today Catalysis में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

नीलगिरी की पत्तियों से तैयार हुआ ग्रीन कैटेलिस्ट

शोधकर्ताओं ने नीलगिरी की पत्तियों से एक विशेष हरित उत्प्रेरक विकसित किया है, जिसकी मदद से बेकार प्लास्टिक की बोतलों को उपयोगी रासायनिक पदार्थ में बदला जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस कैटेलिस्ट को चुंबक की सहायता से अलग कर कई बार दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पूरी प्रक्रिया कम लागत वाली होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित बनती है।

बार-बार नया आकार देने वाली इंजीनियरिंग सामग्री

रासायनिक प्रक्रिया के बाद तैयार सामग्री को गर्म करके मनचाहा आकार दिया जा सकता है। ठंडा होने पर यह मजबूत बनी रहती है और जरूरत पड़ने पर दोबारा गर्म कर नया आकार भी दिया जा सकता है। यदि इससे बनी कोई वस्तु क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे फेंकने की बजाय मरम्मत कर फिर से उपयोग में लाया जा सकता है। यही विशेषता इसे पारंपरिक प्लास्टिक से अलग और अधिक उपयोगी बनाती है।

3डी प्रिंटिंग और उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ

वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में 3डी प्रिंटिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग प्रोटोटाइप, शैक्षणिक मॉडल और कस्टमाइज्ड प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। इससे कम कचरे के साथ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे और नए प्लास्टिक के उत्पादन की आवश्यकता भी घटेगी।

प्लास्टिक प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ी पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का बड़े स्तर पर उपयोग किया गया तो प्लास्टिक कचरे का प्रभावी पुनर्चक्रण संभव होगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

Updated on:
04 Aug 2026 12:46 pm
Published on:
04 Aug 2026 12:46 pm