भोपाल

प्रदेश के गांव में अब नो एंट्री, 90 फीसदी पंचायतों ने लगाया जनता कर्फ्यू

1 लाख संदिग्ध संक्रमित मिलने के बाद बाहरी लोगों के जाने पर प्रतिबंध, गांव में आवश्यक गतिविधियां चालू।
2 min read
May 10, 2021
public_curfew.jpg

भोपाल. प्रदेश के गांवों में एक लाख से ज्यादा कोरोना के संदिग्ध संक्रमित चिह्नित होने के बाद 90 फीसदी गांवों ने अपने यहां जनता कर्फ्यू लगा दिया है। गांवों में आवश्यक गतिविधियां तो चालू हैं, लेकिन बाहर से आने वाले लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। उन्हें 15 दिन क्वारंटीन होने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। इस व्यवस्था को और मजबूत तथा निष्पक्ष बनाने पुलिस, सरपंच, गांव का मुखिया, सचिव और ग्राम सहायकों की मैनेजमेंट टीम बनाई गई है।

सर्दी-खांसी, बुखार सहित अन्य लक्षण मिलने पर सूचना पंच और सरपंचों के जरिए मैनेजमेंट टीम को दी जाती है। संदिग्ध संक्रमित को सबसे पहले पंचायत, आंगनबाड़ी, स्कूल भवनों में क्वारंटीन किया जा रहा है। गांव से जुडऩे वाली सड़कों पर बांस-बल्ली के बैरिकेड्स लगाए गए हैं। इसकी सूचना स्थानीय थाना या गांव प्रभारी पुलिस को दी जा रही है।

टीकाकरण के रोडमैप पर भी तमाम रोड़े हैं, लेकिन ग्रामीणों को टीकाकरण से ही संक्रमण से बचाया जा सकता है। हालांकि टीकाकरण का फोकस अब सरकार ने गांवों पर किया है। डोज पहुंचाने वैक्सीन वैन की सबसे ज्यादा जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के पास जिलों में वैक्सीन वैन पांच से दस के बीच हैं। विभाग पल्स पोलियो, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए किए जाने वाले नियमित टीकाकरण की व्यवस्थाओं के भरोसे गांव में कोरोना के टीके लगाने की तैयार कर रहा था, जो फेल हो गया है। नियमित केंद्रों और कोरोना वैक्सीन केन्द्रों में अंतर होगा। इन केंद्रों को नियमित टीकाकरण केंद्रों के हिसाब से नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में संक्रमण अब शहरों से ज्यादा गांव में फैल सकता है। ऐसे में वैक्सीनेशन के लिए कैंप लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

प्रतिबंध लगाने में देवास, हरदा, दतिया, पन्ना, नीमच, आगर मालवा, नरसिंहपुर,भोपाल और विदिशा जिले आगे है। वही धार, छिंदवाड़ा, अशोक नगर, मंडला, राजगढ़, छतरपुर और शाजापुर जिले पीछे रहे हैं।

Published on:
10 May 2021 08:17 am