बीजापुर

नक्सल प्रभावित जिले में बेटियां असुरक्षित, हर महीने एक मासूम बन रही शिकार, डेढ़ साल में पॉक्सो के 31 मामले

CG News: दक्षिण बस्तर का बीजापुर जिला नक्सल प्रभावित इलाकों में गिना जाता है, लेकिन अब यहां बच्चियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिछले डेढ़ साल में जिले के अलग-अलग इलाकों से 31 पॉक्सो एक्ट के मामले सामने आए हैं। यानी औसतन हर महीने एक बेटी की अस्मिता तार-तार हो […]

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नक्सल प्रभावित जिले में बेटियां असुरक्षित (Photo source- Patrika)

CG News: दक्षिण बस्तर का बीजापुर जिला नक्सल प्रभावित इलाकों में गिना जाता है, लेकिन अब यहां बच्चियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिछले डेढ़ साल में जिले के अलग-अलग इलाकों से 31 पॉक्सो एक्ट के मामले सामने आए हैं। यानी औसतन हर महीने एक बेटी की अस्मिता तार-तार हो रही है।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, मोबाइल का दुरुपयोग और लोकलज्जा के डर से कई परिवार शिकायत दर्ज नहीं कराते। नतीजा यह होता है कि अपराधी अक्सर बच निकलते हैं और दोबारा अपराध करने का मौका पा जाते हैं।

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CG News: अनाचार वारदात ने हिलाकर रख दिया

25 अगस्त को एक कस्बाई क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। बाल कल्याण समिति से मिली जानकारी के मुताबिक, बारिश के दौरान एक महिला ने पड़ोस की 15 वर्षीय बच्ची को अपने घर बुलाया। रात में महिला के देवर ने बच्ची के हाथ-पैर बांध दिए और मुंह में कपड़ा ठूंसकर जबरन दुष्कर्म किया। डर और शर्म के कारण बच्ची चुप रही, लेकिन गर्भ ठहरने के बाद परिवार को सच्चाई का पता चला। मामला थाने पहुंचा और आरोपी ने अपराध कबूल भी किया।

दबे रह जाते हैं कई केस

जिले में कई मामले शिकायत तक नहीं पहुंचते। ग्रामीण परिवार सामाजिक डर, बदनामी या जानकारी के अभाव में चुप रह जाते हैं। यही वजह है कि पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाता और अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं।

राज्यभर में बढ़े पॉक्सो के केस

सिर्फ बीजापुर ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में पॉक्सो मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। उच्च न्यायालय बिलासपुर में फिलहाल 51 पॉक्सो से जुड़े केस लंबित हैं। वहीं कोरबा जिले से चार बलात्कार आरोपी जेल से फरार होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। कानून के अनुसार पॉक्सो एक्ट में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। दोषी को न्यूनतम 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। 2019 में हुए संशोधन में गंभीर मामलों में मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है। साथ ही जांच और सुनवाई को समयबद्ध पूरा करना अनिवार्य है।

सबसे ज्यादा जरूरत जागरूकता की

CG News: विशेषज्ञों का मानना है कि बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित और पिछड़े जिलों में जहां आदिवासी परिवार शिक्षा व जानकारी से दूर हैं, वहां सबसे बड़ी जरूरत जागरूकता की है। महिला एवं बाल विकास विभाग को गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाना होगा। जब तक परिवार और समाज खुलकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक बेटियों की अस्मिता सुरक्षित नहीं हो पाएगी।

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Published on:
31 Aug 2025 01:25 pm
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